Vice President Election: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार से फोन पर बात की। यह बातचीत ऐसे मौके पर हो रही है जब 9 सिंतबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। हालांकि, फडणवीस ने आज मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात भी की थी जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की कयासबाजी शुरू हो गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (बाएं), शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे (बीच) और राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार (दाएं) (फाइल फोटो)
फडणवीस ने उद्धव को लगाया फोन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को फोन किया और राजग की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन के लिए समर्थन मांगा। शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सदस्य राउत ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, ‘‘राजनाथ (सिंह) और देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को फोन किया और (राधाकृष्णन के पक्ष में) मतदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने दूसरों को भी फोन किया होगा। यह उनका काम है।’’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ठाकरे को फोन कब किया गया था।
राधाकृष्णन बनाम सुदर्शन रेड्डी
भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को अपना प्रत्याशी बनाया है। तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि वाले राधाकृष्णन ने बुधवार को राजग की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार रेड्डी ने गुरुवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नौ सितंबर को होगा।
राज ठाकरे से मिले फडणवीस
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दक्षिण मुंबई स्थित उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में मुलाकात की, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब ‘बेस्ट’ कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था। हालांकि, उनका संयुक्त पैनल चुनाव में एक भी पद नहीं जीत पाया।
