बिहार की मतदाता सूची के रिवीजन को लेकर कल होने वाली हम सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में एक अहम जनहित याचिका दाखिल हुई है। याचिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मान्यता रद्द करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया है कि कांग्रेस तथा उसके वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ झूठा आंदोलन चलाकर आयोग की संवैधानिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। याचिका सतीश अग्रवाल नाम के सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा दाखिल की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग (फाइल फोटो:PTI)
याचिका में दलील दी गई है कि कांग्रेस के नेताओं द्वारा वोट चोर जैसी अशोभनीय टिप्पणियां करके चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में न सिर्फ पार्टी की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है, बल्कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन करके कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ जांच कराए जाने की बात कही है।
क्या SIR पर रोक लगाएगा सुप्रीम कोर्ट?
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई बेहद अहम है। देश की सबसे बड़ी अदालत इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या मतदाता सूची के परीक्षण का काम बिहार में सही ट्रैक पर जा रहा है? बिहार में कोई भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो। पिछली बार चुनाव आयोग को उन 65 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने का आदेश कोर्ट ने दिया था जो ड्राफ्ट रोल से बाहर रह गए थे। इसके साथ ही वह लोग जिनका नाम गलत तरीके से इस लिस्ट से बाहर हो गया वह आधार कार्ड के साथ अपनी आपत्ति दाखिल कर सकते थे।
वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग लगातार इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा रहा है और पारदर्शिता के लिए दस्तावेजों को अधिकारियों के बीच साझा भी कर रहा है। बीते रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कांफ्रेंस करके यह सफाई दी थी की कानून के मुताबिक वह किसी भी किसी के पक्ष में है और न किसी के विपक्ष में बल्कि वह मतदाताओं के साथ है।
