Court orders attachment of Bikaner House: हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश के बाद अब इसी तरह का मामला बीकानेर हाउस को भी लेकर सामने आया है। दिल्ली की एक अदालत ने एक कंपनी को 50.31 लाख रुपये के मध्यस्थ राशि का भुगतान करने में विफल रहने पर राजस्थान में नोखा नगर परिषद के स्वामित्व वाले बीकानेर हाउस को कुर्क करने का निर्देश दिया है। जिला न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने आदेश पारित करते हुए कहा कि इस साल की शुरुआत में नगर पालिका द्वारा दायर अपील खारिज होने के बाद एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में 2020 का मध्यस्थ राशि अंतिम पाया गया है।
बीकानेर हाउस कुर्क करने के आदेश
बीकानेर हाउस कुर्क करने का आदेश
18 सितंबर को पारित एक आदेश में जज ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने का जिक्र किया था। अदालत ने कहा, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि जजमेंट डेटर (JD) बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अपनी संपत्ति का हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश का पालन करने में विफल रहे, अदालत ने डिक्री धारक (DH) की ओर से किए गए प्रस्तुतीकरण से सहमत होते हुए जज ने कहा कि यह जेडी की बीकानेर हाउस, नई दिल्ली की अचल संपत्ति के खिलाफ कुर्की वारंट जारी करने का उपयुक्त मामला है। '
अदालत ने 21 जनवरी, 2020 को मध्यस्थ न्यायाधिकरण द्वारा पारित मध्यस्थ पुरस्कार को लागू करने की मांग करने वाले एक आवेदन पर आदेश पारित किया। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ने नोखा नगर पालिका को संपत्ति को बिक्री, उपहार या किसी तरीके से हस्तांतरित करने या चार्ज करने से रोक दिया है। अदालत ने नोखा नगर पालिका के प्रतिनिधि को सुनवाई की अगली तारीख 29 नवंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
हिमाचल भवन भी कुर्क
बता दें कि इससे पहले 20 नवंबर को हिमाचल हाई कोर्ट ने बिजली कंपनी का बकाया वक्त रहते नहीं दे पाने के कारण दिल्ली स्थिति हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश दिया था। लाहौल मामला ये है कि स्पीति की चेनाब नदी पर 400 मेगावाट का एक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगना था। लेकिन किन्हीं कारणों से यह प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर पाया। इसके बाद सेली हाइड्रो पावर इलेक्ट्रिक कंपनी ने अपफ्रंट मनी के तौर पर सरकार के पास जमा 64 करोड़ रुपए वापस देने की मांग की। मामला कोर्ट में गया और उसने हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश दे दिए।
