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CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी को लेकर निखिल वागले और संजय राउत के खिलाफ अवमानना याचिका, SCBA ने की कार्रवाई की मांग

याचिका में कहा गया है कि विपक्षी दलों ने 10 अक्टूबर को मुलाकात का अनुरोध किया था और 11 अक्टूबर को CJI की ओर से पत्र के जरिए मुलाकात से इनकार किया गया था।

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फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना याचिका दायर की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर 2026 को याचिका दायर करने के लिए लिखित सहमति दी थी। हालांकि, अटॉर्नी जनरल की सहमति का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का संज्ञान ले लिया है या दोनों को दोषी ठहरा दिया है।

निखिल वागले ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा था?

याचिका के मुताबिक, निखिल वागले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में CJI सूर्यकांत के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। यह पोस्ट उस घटनाक्रम के संदर्भ में थी, जिसमें विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को CJI से मिलने की अनुमति नहीं मिली थी। याचिका में कहा गया है कि विपक्षी दलों ने 10 अक्टूबर को मुलाकात का अनुरोध किया था और 11 अक्टूबर को CJI की ओर से पत्र के जरिए मुलाकात से इनकार किया गया था। इसके बाद वागले ने कथित तौर पर CJI को निशाना बनाते हुए टिप्पणी की।

SCBA ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इस तरह की भाषा न्यायपालिका की गरिमा और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को कमजोर करती है। एसोसिएशन का कहना है कि वह अदालतों की निष्पक्ष और सद्भावनापूर्ण आलोचना के खिलाफ नहीं है, लेकिन कथित अपमानजनक और आधारहीन टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

संजय राउत के बयान पर SCBA को क्या आपत्ति है?

याचिका में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। याचिका के मुताबिक, राउत ने 12 अक्टूबर को रिपोर्ट किए गए एक बयान में आरोप लगाया था कि न्यायाधीश बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्री हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए डिनर आयोजित करते हैं। उन्होंने लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ न्यायाधीशों के बैडमिंटन खेलने की तस्वीरों का भी हवाला दिया था। SCBA का आरोप है कि इस तरह के बयान न्यायपालिका के बारे में गलत और भ्रामक धारणा पैदा करते हैं। एसोसिएशन ने कहा है कि न्यायाधीशों के आचरण को लेकर तथ्यात्मक आधार के बिना लगाए गए आरोप अदालत की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकते हैं।

बैडमिंटन की तस्वीरों को लेकर क्या है विवाद?

याचिका में बैडमिंटन खेलने वाली तस्वीरों के मामले का भी उल्लेख है। इसमें दिल्ली हाई कोर्ट के 19 जून 2026 के आदेश का हवाला दिया गया है। यह आदेश बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में पारित हुआ था। याचिका के अनुसार, सोशल मीडिया पर जिन तस्वीरों को लंदन में न्यायाधीशों और राजनीतिक हस्तियों के साथ होने वाली गतिविधि के रूप में पेश किया जा रहा था, वे वास्तव में 29 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित ऑल इंडिया जजेज बैडमिंटन चैंपियनशिप की थीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि तस्वीरों को लेकर भ्रामक सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए थे। SCBA ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए राउत की टिप्पणियों पर सवाल उठाए हैं।

अटॉर्नी जनरल ने क्यों दी सहमति?

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने 14 अक्टूबर को अटॉर्नी जनरल से आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति मांगी थी। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को लिखित सहमति दे दी। याचिका में इसका आधार अवमानना कानून की धारा 15(1)(b) और सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नियम, 1975 के नियम 3(c) को बनाया गया है।

अटॉर्नी जनरल ने अपने पत्र में वागले की टिप्पणी को अपमानजनक बताया। राउत के बयानों के संदर्भ में भी उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने या उनके लिए डिनर आयोजित किए जाने संबंधी आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं थे। बैडमिंटन तस्वीरों के मामले में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के पहले के आदेश का भी उल्लेख किया।

SCBA ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?

SCBA ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि निखिल वागले और संजय राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। याचिका में दोनों की व्यक्तिगत पेशी की मांग भी की गई है। इसके अलावा, SCBA ने X Corp, Meta (Instagram), Google (YouTube) और IANS को संबंधित पोस्ट, वीडियो, अकाउंट रिकॉर्ड और लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में ऐसी सामग्री को हटाने का अनुरोध भी किया गया है, जो अब भी उपलब्ध है। साथ ही, मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान इसी तरह के आरोपों या टिप्पणियों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

निखिल वागले ने मांगी माफी

इस मामले के बीच निखिल वागले ने 15 अक्टूबर को X पर अटॉर्नी जनरल को संबोधित एक पत्र साझा किया। इसमें उन्होंने CJI सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही। उन्होंने बताया कि विवादित पोस्ट हटा दी गई है और अटॉर्नी जनरल से अनुरोध किया कि वे इस मामले को आगे न बढ़ाएं।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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