संविधान में निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व की अनिवार्यता नहीं: सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में दलील दी है कि संविधान में निर्वाचन आयोग में नियुक्ति के लिए गठित समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व की अनिवार्यता नहीं है। सरकार ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों अधिनियम, 2023, निर्वाचन आयोग के किसी भी कार्य में हस्तक्षेप नहीं करता है।​

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में दलील दी है कि संविधान में निर्वाचन आयोग (EC) में नियुक्ति के लिए गठित समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व की अनिवार्यता नहीं है और न्यायपालिका का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य को शामिल करना ''विधायी विकल्प है, संवैधानिक अनिवार्यता नहीं''। सरकार ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023, निर्वाचन आयोग के किसी भी कार्य में हस्तक्षेप नहीं करता है।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

केंद्र ने ये दलीलें उच्चतम न्यायालय में दाखिल जवाबी हलफनामे में दी हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को विनियमित करने वाले 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा है। अधिनियम दो जनवरी, 2024 को लागू हुआ। इसमें प्रावधान है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की सदस्यता वाली एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाएगी।

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