दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर से विपक्षी एकजुटता की पहली कोशिश की तस्वीर सामने निकलकर आई। खरगे के अलावा, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने साथ बैठकर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाई है।
बैठक के दौरान विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने खाका खींचा गया
सूत्र का कहना है कि हिंदुत्व कार्ड के जवाब में जातीय गणना को हथियार बनाने के पीछ सबसे बड़ा कारण है कि यह ओबीसी की राजनीति करने वाले तमाम विपक्षी दलों को सूट कर सकता है। इसी के बदौलत बीएसफी सुप्रीमो मायावती और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को भी साथ लेने की पहल की जा सकती है, जो कि अभी तक गैर कांग्रेसी विपक्ष की वकालत करते आ रहे हैं।
'जातीय गणना पर सर्वदलीय सहमित बनाने की कोशिश की जाएगी'
सूत्र हमें यह भी बता रहे हैं कि जातीय गणना पर सर्वदलीय सहमित बनाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही इसको लेकर जल्द ड्राफ्ट पेश किया जाएगा। कांग्रेस सूत्र का यह भी कहना है कि जिन दलों को कांग्रेस पार्टी से परहेज है, उन्हें साथ लाने की जिम्मेदारी नीतीश कुमार, लालू यादव और तेजस्वी यादव को दी गई है। ऐसे नेताओं की लिस्ट में मायावती और अखिलेश यादव के अलावा ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल जैसे नेता हैं। हाल में शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने भी तेवर दिखाए थे।
संविधान सुरक्षित रखेंगे, और लोकतंत्र बचाएँगे ! श्री @RahulGandhi जी और हमने बिहार के मुख्यमंत्री श्री… t.co/ymhk3xVUuG
— ANI (@ANI) Apr 12, 2023
बैठक में यह भी तय हुआ है कि जिन राज्यों में गठबंधन कर सकते हैं वहां गठबंधन किया जाएगा। और जहां ऐसा नहीं कर सकते वहां दोस्ताना लड़ाई लड़ने की कोशिश की जाएगा। सूत्रों ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले समय में ऐसी और बैठकें आयोजित की जाएगी।
नीतीश कुमार ने खरगे और राहुल गांधी से की मुलाकात
आपको बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अधिक से अधिक विपक्षी दलों को एकजुट करने और देश के लिए 'विपक्ष का दृष्टिकोण' सामने रखने का निर्णय लिया गया। खरगे के आवास पर हुई इस बैठक में खरगे, नीतीश और राहुल गांधी के अलावा बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री संजय झा, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह भी मौजूद रहे।
खरगे ने इस बैठक को ऐतिहासिक करार दिया
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने इस बैठक को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि आगे सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'हमने यहां पर ऐतिहासिक बैठक की है और बहुत सी चीजों पर चर्चा की है। हम सभी ने मिलकर तय किया कि सभी पार्टियों को एकजुट करना है और आने वाले चुनाव में एकजुट होकर लड़ना है। हम सब मिलकर इसी रास्ते पर काम करेंगे।'
'जिस दिन बैठेंगे, उस दिन जानिएगा, बहुत ज्यादा लोग इकट्ठा होंगे'
जद (यू) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार ने कहा कि यहां अंतिम रूप से बातचीत हो गई और इसी के आधार पर आगे अधिक से अधिक दलों को साथ लाना है। उन्होंने कहा, 'हम अधिक से अधिक पार्टियों को पूरे देश में एकजुट करने का प्रयास करेंगे। सब लोग सहमति जताएंगे, एकसाथ बैठेंगे, मिलकर चलेंगे। यह बात तय हुई है। अंतिम तौर पर बात हो गई है, उसी के आधार पर आगे चलेंगे। जितने लोग सहमत होंगे उन सभी लोगों के साथ मिलकर आगे की चीजें तय करेंगे।' यह पूछे जाने पर कि कितने दल साथ आएंगे तो बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, 'जिस दिन बैठेंगे, उस दिन जानिएगा, बहुत ज्यादा लोग इकट्ठा होंगे।'
'विपक्ष को एकजुट करने में बहुत ऐतिहासिक कदम उठाया गया है'
राहुल गांधी ने भी इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि विचाराधारा की लड़ाई को मिलकर लड़ा जाएगा। उनका कहना था, 'विपक्ष को एकजुट करने में बहुत ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह एक प्रक्रिया है, देश के लिए विपक्ष के दृष्टिकोण को विकसित करेंगे। जितनी भी पार्टियां हमारे साथ चलेंगी, उनको साथ लेकर देश में विचारधारा की लड़ाई को लड़ेंगे। संस्थाओं और देश पर जो आक्रमण हो रहा है उसके खिलाफ हम एकसाथ मिलकर खड़े होंगे।'
