Pakistan's UNSC presidency : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा है कि वह पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र (UN) में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने से रोकने में विफल रही है, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार है। मंगलवार को पाकिस्तान ने कहा कि उसने जुलाई के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अध्यक्षता संभाल ली है। यह भूमिका पाकिस्तान की जनवरी 2025 में शुरू हुई UNSC की अस्थायी सदस्यता के अंतर्गत मिली है। इसके साथ ही पाकिस्तान को तालिबान प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता और आतंकवाद रोधी समिति (काउंटर टेररिज्म कमेटी) के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी दी गई है।
कांग्रेस ने मोदी सरकार की कूटनीति पर उठाए सवाल।
'अब शैतान ही कुर्सी पर बैठा है'
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'एक ऐसा देश जो आतंकवाद को समर्थन देता है, आतंकवादियों को शरण देता है और भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देता है, अब वैश्विक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है।' उन्होंने तीखा सवाल उठाया, 'अब शैतान ही कुर्सी पर बैठा है।'
आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ा भारत-सुरजेवाला
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता के चलते भारत आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ गया है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के कुछ ही सप्ताह बाद हुआ, और सरकार ने इसे रोकने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया। सुरजेवाला ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री मोदी पर विदेश नीति को केवल दिखावे और प्रचार तक सीमित रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाया जाना विडंबना है, जबकि वह बार-बार आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करता रहा है।
'कूटनीति केवल फोटो खिंचवाने से नहीं चलती'
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जब चीन के समर्थन से पाकिस्तान ने भारत द्वारा आतंकी अब्दुल रऊफ को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को अवरुद्ध किया था, तब भी मोदी सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने अफसोस जताया कि भारत अपने पारंपरिक और भरोसेमंद कूटनीतिक सहयोगियों को खो चुका है। उन्होंने कहा, 'आज भारत मालदीव, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के समर्थन से भी वंचित है। कूटनीति केवल फोटो खिंचवाने और भाषणों से नहीं चलती।'
