कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाए गए संसद के विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह फैसला एकतरफा तरीके से लिया है और इसके पीछे राजनीतिक मंशा साफ दिखाई दे रही है। जयराम रमेश के मुताबिक, 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ में संशोधन की बात कही थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (फाइल फोटो)
सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
इसके जवाब में कांग्रेस ने तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की, ताकि इस मुद्दे पर सामूहिक चर्चा हो सके। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को लगभग सभी विपक्षी दलों ने सरकार को पत्र लिखकर 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव दिया, क्योंकि तब तक चुनाव आचार संहिता लागू रहेगी। इसके बावजूद सरकार ने विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज करते हुए विशेष सत्र बुलाने का निर्णय ले लिया।
“बांटो और राज करो” की रणनीति
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की रणनीति “बांटो और राज करो” की है और वह विपक्ष को अलग-थलग कर अपनी राजनीतिक बढ़त बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार 2-3 अप्रैल को सत्र बुलाना चाहती थी, ताकि असम और केरल चुनाव से पहले इसका फायदा लिया जा सके। जब यह संभव नहीं हुआ, तो अब बंगाल और तमिलनाडु चुनाव से ठीक पहले सत्र बुलाया गया है।
कई राज्यों हो सकता है नुकसान
जयराम रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि यह विशेष सत्र सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिसीमन (डिलिमिटेशन) का मुद्दा भी शामिल है, जिस पर अब तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का प्रस्ताव “खतरनाक” हो सकता है और इससे कई राज्यों- खासतौर पर दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों को नुकसान हो सकता है।
लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता के बीच इस तरह का सत्र बुलाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और यह स्पष्ट रूप से उसका उल्लंघन है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि 16 अप्रैल से पहले विपक्षी दलों की एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें विशेष सत्र को लेकर साझा रणनीति तैयार की जाएगी। जयराम रमेश ने दावा किया कि सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और वे सरकार की “फूट डालो और राज करो” की नीति को सफल नहीं होने देंगे।
