कांग्रेस के पूर्व चीफ राहुल गांधी ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने पूछा है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से लेकर एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) की पूंजी अडानी को...आखिरकार खुलासे (हिंडनबर्ग से जुड़े) के बाद भी रिटायरमेंट की रकम अडानी की कंपनियों में क्यों लगाई जा रही है?...पीएम को आखिरकार इतना डर किस बात का है?
उन्होंने सोमवार (27 मार्च, 2023) को माइक्रो ब्लॉगिंग मंच टि्वटर पर ट्वीट किया, "एलआईसी की पूंजी, अडाणी को! एसबीआई की पूंजी, अडाणी को! ईपीएफओ की पूंजी भी, अडाणी को! ‘मोडानी’ के खुलासे के बाद भी, जनता के रिटायरमेंट का पैसा अडानी की कंपनियों में निवेश क्यों किया जा रहा है?" गांधी ने इसी ट्वीट में आगे सवाल उठाया, ‘‘प्रधानमंत्री जी, न जांच, न जवाब! आख़िर इतना डर क्यों?’’
वैसे, गांधी ने इससे पहले 25 मार्च को आरोप लगाया था कि अडानी केस से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ओबीसी के अपमान (मोदी सरनेम केस) का मुद्दा उठाया गया। पत्रकारों से वह बोले थे, ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि सभी एक हैं...यह ओबीसी का मामला नहीं है, यह अडानी और मोदी के रिश्तों का मामला है। भाजपा ध्यान भटकाने का प्रयास करती है।’’
मैंने प्रधानमंत्री की आखों में डर देखा है - वो डरते हैं अडानी पर संसद में मेरे अगले भाषण से।सीधा सवाल है - शेल कं… t.co/MiiZwgR69C
— ANI (@ANI) Mar 25, 2023
हालांकि, भाजपा के सीनियर नेता रविशंकर प्रसाद ने उन आरोपों को खारिज किया कि गांधी को लोकसभा से इसलिए अयोग्य ठहराया गया, क्योंकि पीएम मोदी अडानी मुद्दे पर उनके सवालों से ‘डरे’ हैं। दरअसल, कांग्रेस की ओर से अडानी ग्रुप के साथ बीजेपी, एनडीए और पीएम को लेकर इस तरह के हमले तब आए हैं, जब अमेरिका की वित्तीय शोध संस्था ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की एक रिपोर्ट आने के बाद से भारतीय मार्केट से लेकर सियासी गलियारों में बवाल मचा था।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप के खिलाफ फर्जी तरीके से लेन-देन और शेयर की कीमतों में हेर-फेर सहित कई आरोप लगाए थे। हालांकि, ग्रुप ने इन आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा था कि उसने सभी कानूनों और प्रावधानों का पालन किया है।
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