Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। खड़गे ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तानाशाही और दमन का आरोप लगाया। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड और न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर करारा हमला बोला है। खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
'यह कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है': अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर केंद्र पर बरसे खड़गे
खड़गे का तीखा प्रहार: 'न्याय की गुहार पर दमन और वीआईपी को गवर्नरशिप'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, 'मोदी सरकार की कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा! न्याय की गुहार मांगने वाले अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत, और भाजपाई 'VIP' को गवर्नर-शिप! सत्ता का यह दमन सरकार की ताकत नहीं, बल्कि सवालों से भागने का प्रमाण है। एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है। अंकिता बेटी को न्याय दिलवाने के लिए कांग्रेस पार्टी संघर्ष करती रहेगी।'
अपने इस बयान के जरिए खड़गे ने एक तरफ जहां शोक संतप्त माता-पिता के साथ पुलिसिया सलूक पर कड़ा ऐतराज जताया, वहीं दूसरी तरफ मामले से जुड़े राजनीतिक और वीआईपी एंगल पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अंकिता भंडारी मामला क्या था?
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता की हत्या के बाद से लगातार उनके माता-पिता और विभिन्न राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन हत्या से जुड़े कथित 'VIP' लोगों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई। इसके कुछ दिनों बाद 24 सितंबर 2022 को उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया।
हत्याकांड को भले ही कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले से जुड़े अनसुलझे सवाल, कथित 'VIP' की पहचान का मुद्दा और पीड़ित परिवार का संघर्ष आज भी देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में बना हुआ है।
इस जघन्य हत्याकांड में रिजॉर्ट के मालिक और तत्कालीन भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद बीजेपी ने कार्रवाई करते हुए विनोद आर्य और उनके बेटे अंकित आर्य को पार्टी से निलंबित कर दिया था। लंबी कानूनी लड़ाई और सुनवाई के बाद, मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई, और वे वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं।
न्याय की मांग को लेकर जब परिजन और समर्थक मुखर हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वे इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। बता दें कि शुरुआत से ही इस केस में एक रहस्य 'VIP' को लेकर बना हुआ है। पुलिस जांच के दौरान तत्कालीन डीजीपी ने बताया था कि अंकिता ने अपने एक दोस्त को चैट में बताया था कि उसे रिजॉर्ट के किसी 'VIP' मेहमान को 'विशेष सेवाएं' देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। परिवार और जनता लगातार यह सवाल उठाती रही कि वह वीआईपी कौन था?
