रायपुर में कांग्रेस नेताओं के महाकुंभ में पार्टी की दशा-दिशा पर चर्चा हो रही है। यह जुटान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम चुनाव 2024 से पहले तीन बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। 2018 के विधानसभा में चुनावी नतीजे 3-0 के साथ कांग्रेस के पक्ष में थे। लेकिन दो करीब डेढ़ साल बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ अपनी कुर्सी बचाने में नाकाम रहे और मुकाबला 2-1 का हो गया। कांग्रेस के लिए ये राज्य इसलिए अहम हैं क्योंकि उनके रणनीतिकारों को यकीन है कि यूपी में होने वाले नुकसान की भरपाई यहां से हो सकती है। इन सबके बीच महाकुंभ में जुटने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से क्या करें क्या ना करें के निर्देश जारी किए गए हैं।
रायपुर में कांग्रेस नेताओं की जुटान(सौजन्य- congress twitter handle)
क्या करें, क्या ना करें पर जोर
रायपुर में तीन दिवसीय सम्मेलन में पार्टी के संविधान में नए नियम जोड़े गए। कांग्रेस सदस्यों को नशे से दूर रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से पार्टी की आलोचना नहीं करनी चाहिए। इसमें साफ किया गया है कि सदस्य को अपने बारे में बताना होगा कि वो स्वयंसेवी कार्य और सामुदायिक सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही किसी जघन्य अपराध के लिए दोषी नहीं करार दिया गया है। यह भी बताना होगा कि वो साइकोट्रोपिक पदार्थों, प्रतिबंधित दवाओं और नशीले पदार्थों के उपयोग से दूर रहता है। विशेष रूप से वंचित और गरीब वर्गों के लिए श्रमदान सहित समाज के लिए सार्वजनिक संपत्ति के निर्माण के लिए कार्यों और परियोजनाओं में भाग लेता है। सामाजिक न्याय, समानता और सद्भाव के कारण की सेवा करने के लिए खुद को संचालित करता है। संशोधनों में इस बात की भी जिक्र है कि वो शख्स भूमि सीलिंग कानूनों का उल्लंघन नहीं किया है। न ही उसे किसी जघन्य अपराध या नैतिक अधमता के अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है। धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के सिद्धांतों की सदस्यता लेता है और उसके लिए काम करता है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, खुले तौर पर या अन्यथा, सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की स्वीकृत नीतियों और कार्यक्रमों की प्रतिकूल आलोचना नहीं करना है।
15 हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल
कांग्रेस के 85वें पूर्ण सत्र में 15,000 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो 24 फरवरी से शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन, कांग्रेस संचालन समिति ने पार्टी की शीर्ष परिषद, कार्य समिति के लिए चुनाव नहीं कराने का फैसला किया और नए पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को अपने सदस्यों को नामित करने के लिए अधिकृत किया। 24 फरवरी को ही पार्टी की विषय समिति ने अपनी पहली बैठक की। बैठक में सत्र में अपनाए जाने वाले छह प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हुआ।
