UPI पर MDR को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला, बोली- अमेरिकी कंपनियों का दबाव; आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बोझ

कांग्रेस ने मांग की है कि UPI पर MDR व्यवस्था को वापस लिया जाए और इसे पहले की तरह बहाल किया जाए। पार्टी का कहना है कि UPI भारत में विकसित डिजिटल भुगतान व्यवस्था है और इसे आम लोगों के लिए सुलभ और कम लागत वाला बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

UPI पर MDR लागू किए जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार UPI की लागत बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। पार्टी का कहना है कि भले ही सरकार यह दावा करे कि MDR सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी अपनी लागत का बोझ अंततः ग्राहकों पर डाल सकते हैं। कांग्रेस की दलील है कि देश पहले से महंगाई, बेरोजगारी और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में लोगों को राहत देने के बजाय उनकी मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं।

UPI पर MDR को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

UPI पर MDR को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला(Image Source: iStock)

‘मर्चेंट खुद खर्च नहीं सहेगा, कीमत में जोड़ेगा’

कांग्रेस का कहना है कि अगर किसी मर्चेंट पर अतिरिक्त लागत आती है, तो वह इसे लंबे समय तक अपनी जेब से नहीं उठाएगा। पार्टी के मुताबिक, व्यापारी इस लागत को सामान और सेवाओं की कीमत में जोड़ सकते हैं और इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि UPI पर MDR बढ़ाने के पीछे अमेरिकी कंपनियों का दबाव भी एक कारण है। पार्टी का दावा है कि अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से MDR बढ़ाने की मांग करती रही हैं और Mastercard तथा Visa को होने वाले नुकसान का हवाला देती रही हैं।

‘UPI पहले की तरह बहाल किया जाए’

कांग्रेस ने मांग की है कि UPI पर MDR व्यवस्था को वापस लिया जाए और इसे पहले की तरह बहाल किया जाए। पार्टी का कहना है कि UPI भारत में विकसित डिजिटल भुगतान व्यवस्था है और इसे आम लोगों के लिए सुलभ और कम लागत वाला बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

UPI की लागत को लेकर कांग्रेस की दलील

कांग्रेस के मुताबिक, भारत में UPI को चलाने की सालाना लागत करीब 20,700 करोड़ रुपये है। पार्टी का दावा है कि पिछले वित्त वर्ष में RBI ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया था। कांग्रेस का कहना है कि इस राशि का लगभग 7 फीसदी UPI के संचालन की लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। पार्टी का तर्क है कि सरकार और RBI मिलकर UPI के संचालन का खर्च वहन कर सकते हैं और इसके लिए आम लोगों पर अतिरिक्त लागत डालने की जरूरत नहीं है।

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