मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद अब पूरी तरह से गरमा चुका है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद मार्ग थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है, तो दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है।
अब चुनाव आयोग के खिलाफ युवाओं ने खोला मोर्चा
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ चेतावनी दी है कि अगर CEC ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो देश में 'जंतर-मंतर 2.0' जैसा बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। CJP का कहना है कि यह किसी एक राजनीतिक दल-चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस, आप या टीएमसी-का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश के युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।
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CJP ने अपनी बात रखते हुए चुनाव आयोग और सरकार के सामने रखी तीन मुख्य मांगें:
- CEC का इस्तीफा और आपराधिक कार्रवाई: ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और देश को बताया जाए कि उन्हें इस तरह के फैसले लेने का आदेश किसने दिया था।
- आगामी चुनाव रोकें और फाइलें जब्त हों: देश में होने वाले सभी आगामी चुनावों पर तुरंत रोक लगाई जाए, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को फ्रीज करके जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट लागू की जाए। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह एसआईआर से जुड़ी सभी फाइलें अपनी कस्टडी में ले, ताकि बाद में यह बहाना न बने कि चुनाव आयोग के दफ्तर में आग लगने से कागजात जल गए।
- नियुक्ति कानून में बदलाव: मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द किया जाए और आम जनता व सिविल सोसाइटी की भागीदारी के साथ एक नया पारदर्शी कानून बनाया जाए। अब देखना यह होगा कि इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन और चुनाव आयोग क्या रुख अपनाते हैं।
