'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने शुक्रवार को नोएडा की उस महिला का समर्थन किया, जिस पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने का मामला दर्ज किया गया था। पार्टी ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे असहमति जताने वाली आवाजों को निशाना बनाने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास
दिल्ली में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, CJP के चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास ने कहा कि कुछ लोग प्रोटेस्ट के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को पसंद नहीं कर सकते, लेकिन ऐसी बातों पर क्रिमिनल केस करना 'बिल्कुल गलत' है।
दास ने कहा, 'कोई प्रोटेस्ट के दौरान गाली-गलौज की भाषा के इस्तेमाल की बुराई कर सकता है। लेकिन, क्रिमिनल जस्टिस मशीनरी का इस्तेमाल करके पुलिस के जरिए उन्हें टारगेट करना और परेशान करना बिल्कुल गलत है। इस देश में गाली-गलौज कब से क्रिमिनल ऑफेंस बन गया है?'
उन्होंने सरकार और पुलिस से आग्रह किया कि वे 'इस लड़की को अकेला छोड़ दें' और 'युवाओं को निशाना बनाना' बंद करें।
'50% सांसदों पर आपराधिक मामले'
'लोग रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा के 50% सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें रेप, हत्या और डकैती जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं, फिर भी उनके ख़िलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। आप बस उन्हें चुनकर मिसाल बनाना चाहते हैं। यह पूरी तरह से निंदनीय है। मैं एक बार फिर सरकार और उसकी पुलिस मशीनरी से अपील करता हूं कि वे युवाओं को परेशान करना बंद करें। इस तरह युवाओं को निशाना बनाना बंद करें और इस लड़की को अकेला छोड़ दें। ऐसे मामलों में पुलिस बल का इस तरह का दुरुपयोग बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है,' दास ने कहा।
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नोएडा की महिला ने PM मोदी के खिलाफ अपशब्द कहे
यह विवाद नोएडा की एक 25 वर्षीय महिला से जुड़ा है। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
नोएडा के वकील की शिकायत पर FIR दर्ज
नोएडा के एक वकील की शिकायत पर 'जीरो FIR' दर्ज की गई है और उम्मीद है कि इसे उस इलाके के अधिकार क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया जाएगा जहां कथित घटना हुई थी। शिकायतकर्ता वकील स्मृति सिंह ने कहा कि वायरल वीडियो देखने के बाद उन्होंने पुलिस के पास जाने का फैसला किया। उनका तर्क था कि ये टिप्पणियां आपत्तिजनक थीं और स्वीकार्य राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमा को पार कर गई थीं।
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हालांकि, दास ने अधिकारियों पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे नेता तो सार्वजनिक पदों पर बने हुए हैं, जबकि एक युवा प्रदर्शनकारी को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जिन लोगों को इन टिप्पणियों से आपत्ति है, वे आपराधिक कार्रवाई करने के बजाय मानहानि जैसे सिविल कानूनी रास्ते अपना सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की आपत्तिजनक और अभद्र X पोस्ट्स पर कार्रवाई
यह FIR, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर CJP के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शन से जुड़े ऑनलाइन और ऑफलाइन कंटेंट पर दिल्ली पुलिस की व्यापक कार्रवाई के बीच दर्ज की गई है। पुलिस प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स पर नजर रख रही है और उसने ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए हैं। जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन, जो 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के साथ समाप्त हुए, राजनीतिक विवाद का केंद्र बने रहे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद कई FIR दर्ज की गईं, जिनमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए थे।
