भारत के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार का लुंबिनी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। उनका स्वागत उच्च न्यायालय तुलसीपुर, बुटवल बेंच के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री बसुदेव आचार्य ने किया। इस अवसर पर खेन्पो चिमेड लख्याल लामा ने भी मुख्य न्यायाधीश का अभिनंदन किया।
बुद्ध के जन्मस्थल गए मुख्य न्यायाधीश
मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार को भगवान बुद्ध के पावन जन्मस्थल लुंबिनी ले जाया गया, जहां उन्होंने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के विभिन्न स्थलों का अवलोकन किया।
लुंबिनी नेपाल के रुपन्देही जिले में स्थित वह पवित्र स्थल है जिसे भगवान बुद्ध का जन्मस्थान माना जाता है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल लुंबिनी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। यहां मायादेवी मंदिर, अशोक स्तंभ और प्राचीन विहारों के अवशेष मौजूद हैं, जो इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। दुनिया भर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां आकर न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं बल्कि बौद्ध दर्शन और उसकी विरासत को करीब से महसूस भी करते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने व्यक्त किया आभार
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने इस अवसर पर मिले स्नेह और आतिथ्य के लिए हार्दिक आभार जताया और कहा कि यह अनुभव उनके और परिवार के लिए अविस्मरणीय रहेगा। रुपनदेही जिला न्यायालय के जिला न्यायाधीश सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस मौके पर उपस्थित थे।
CJI गवई का बौद्ध धर्म से गहरा जुड़ाव
भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का जीवन बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और मूल्यों से गहराई से प्रभावित रहा है। महाराष्ट्र के नागपुर से आने वाले गवई डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा और बौद्ध दर्शन के अनुयायी हैं। बौद्ध धर्म के प्रति उनका झुकाव केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने हमेशा करुणा, समानता और न्याय जैसे सिद्धांतों को अपने न्यायिक कार्यों और सार्वजनिक जीवन में भी आत्मसात किया है।
गवई अक्सर सार्वजनिक मंचों पर यह बताते रहे हैं कि बौद्ध धर्म के सिद्धांतों ने उन्हें जीवन की कठिनाइयों में धैर्य और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी। हाल ही में नेपाल के लुंबिनी दौरे पर उन्होंने बुद्ध के जन्मस्थल पर जाकर श्रद्धा अर्पित की और वहां की सांस्कृतिक विरासत को भारत और नेपाल के साझा आध्यात्मिक संबंधों की धरोहर बताया। उनका यह दौरा उनके व्यक्तिगत विश्वास और न्यायपालिका में नैतिक मूल्यों की अहमियत का प्रतीक माना जा रहा है।
