Tamil Nadu Elections: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराने का सुझाव दिया है और इस पर सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ पता चल जाएगा कि चुनाव कितने चरण में होंगे।
तमिलनाडु में एक चरण में चुनाव कराने के सुझाव पर विचार किया जाएगा: मुख्य निर्वाचन आयुक्त
तमिलनाडु में हाल में संपन्न मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए कुमार ने इसे देश के लिए एक आदर्श और बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि एसआईआर का स्पष्ट उद्देश्य यह है कि कोई भी योग्य व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति उसमें शामिल न हो।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने राज्य के 75,000 मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। मतगणना प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने कहा कि 'वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल' (वीवीपैट) की अनिवार्य रूप से गिनती की जाएगी, साथ ही मतगणना पूरी होने के बाद भी कोई उम्मीदवार निर्धारित शुल्क जमा कर अगले सात दिन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट का मिलान करा सकता है।
'कुदावोलाई' व्यवस्था का जिक्र
नयी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि ईवीएम की गिनती से पहले दो दौर में डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दक्षिण भारत में प्रचलित रही 'कुदावोलाई' व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु का लोकतंत्र के लिहाज से गौरवशाली अतीत रहा है।
'कुदावोलाई' का शाब्दिक अर्थ मतदान पात्र होता है। दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में 10वीं सदी में चोल साम्राज्य के दौरान घड़े में मतपत्र डालकर मतदान की यह प्रथा प्रचलित थी।
जयललिता के कभी विश्वासपात्र रहे पनीरसेल्वम द्रमुक में शामिल
तमिलनाडु के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और अन्नाद्रमुक से 2022 में निष्कासित ओ पनीरसेल्वम शुक्रवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) में शामिल हो गए।
पनीरसेल्वम ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की सुप्रीमो दिवंगत जे जयललिता के विश्वासपात्र माने जाते थे। अपने मातृ संगठन में फिर से शामिल होने के लिए तीन साल के असफल प्रयास के बाद वह विरोधी पार्टी द्रमुक में शामिल हो गए।
