शहीद हुए पुलिस कांस्टेबल की मां को इस राज्य की सरकार ने पेंशन देने से किया मना, कोर्ट ने दिया अल्टीमेटम!

Martyr Police Constable Pension Matter: अदालत ने कहा कि मृत कर्मचारी की मां को पेंशन देने से इनकार करना बेहद अन्यायपूर्ण है, खासकर तब जब वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के बेटे की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में जान गई।

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नक्सली हमले में जान गंवाने वाले पुलिस कांस्टेबल इग्नाटियस लाकड़ा की 68 वर्षीय मां को पारिवारिक पेंशन से इनकार करने को 'अत्यधिक अन्यायपूर्ण' करार देते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर इस मामले में फैसला करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने फिलिसिता लाकड़ा (68) द्वारा दायर याचिका पर 11 फरवरी को यह आदेश पारित किया। उनका बेटा इग्नाटियस लाकड़ा सूरजपुर जिले में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) की 10वीं बटालियन में कार्यरत थे और 2002 में माओवादियों के साथ मुठभेड़ में उनकी जान चली गई थी। उस समय इग्नाटियस की उम्र 21 साल थी।

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शहीद हुए पुलिस कांस्टेबल की मां को इस राज्य की सरकार ने पेंशन देने से किया मना

पिता के निधन के बाद बिगड़ी स्थिति

इग्नाटियस की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में जान जाने के बाद उनके पिता लोबिन को पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। हालांकि, अगस्त 2020 में लोबिन के निधन के बाद, जशपुर जिले के कोषगार ने पेंशन रोक दी। फिलिसिता ने सीएएफ की 10वीं बटालियन के कमांडेंट तथा जशपुर और अंबिकापुर (सरगुजा) के कोषागार अधिकारियों से पेंशन बहाल करने की गुहार लगाई लेकिन राहत नहीं मिलने पर 2021 में उच्च न्यायालय का रुख किया।

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