Religious Conversion Racket: विदेशी फंडिंग और प्रलोभन और भय दिखाकर अवैध धर्मांतरण कराने एवं दुराचार के आरोपों में घिरे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा समेत आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो गए हैं। एनआईए की विशेष अदालत की न्यायाधीश नीतू पाठक ने सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों पर विभिन्न धाराओं में आरोप तय करते हुए गवाही के लिए दो मई की तारीख निर्धारित की है।
छांगुर बाबा केस में बड़ा खुलासा (फाइल फोटो साभार: PTI)
विदेशी नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की निगाह
मामले की जांच कर रही यूपी एटीएस अब छांगुर बाबा से जुड़े कथित विदेशी फंडिंग नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। जांच के दायरे में उसका करीबी सहयोगी नवीन रोहरा भी है, जिसके सीरिया व स्विस बैंक खातों को खंगाला जा रहा है। हालांकि, अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।
एजेंसियों को शक है कि नवीन रोहरा सीरिया की एक शिपिंग कंपनी से आने वाले पैसों को छांगुर बाबा को भेजा करता था। इन पैसों का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने तथा अन्य गतिविधियों में किया गया। बलरामपुर में खरीदी गई जमीनों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
छांगुर बाबा की कब हुई थी गिरफ्तारी
यूपी एटीएस ने छांगुर बाबा को पिछले साल 5 जुलाई को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को पता चला कि छांगुर बाबा एक संगठित नेटवर्क के जरिए बलरामपुर समेत कई जिलों में अवैध धर्मांतरण कराता था और उसका नेटवर्क महज उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि दक्षिण भारत तक फैला हुआ था। बलरामपुर स्थित उसके ठिकानों पर विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की भी बात सामने आई थी।
इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी फंडिंग जैसे एंगल सामने आने के बाद यूपी एटीएस के साथ अन्य एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं। इस मामले में नेपाल और कुछ खाड़ी देशों से कनेक्शन की भी जानकारी मिली है, जिसकी जांच चल रही है।
अवैध धर्मांतरण के गंभीर आरोप
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन, सबरोज, शहाबुद्दीन, रशीद, राजेश कुमार उपाध्याय समेत अन्य लोगों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था। आरोप है कि इस गिरोह ने 16 नवंबर 2015 के बाद कई जगहों पर गैर-मुस्लिम लोगों को डर, लालच और प्रलोभन देकर अवैध रूप से धर्मांतरण कराया।
