Anti Paper Leak Bill: देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर चौतरफा घिरी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को पेश करने की अनुमति के लिए एक प्रस्ताव रखेंगे। प्रस्तावित विधेयक में सात प्रमुख संशोधन किए जाने हैं। इनका उद्देश्य मौजूदा कानून में मौजूद प्रवर्तन संबंधी खामियों को दूर करना, परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था बनाना और आपराधिक मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करना है।
यह विधायी पहल ऐसे समय में सामने आ रही है, जब 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र पेपर लीक मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के विरोध के चलते अब तक बाधित रहा।
जांच और सुनवाई के लिए तय होगी समयसीमा
प्रस्तावित संशोधन के जरिए वर्ष 2024 में बनाए गए मूल कानून के प्रावधानों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। नए प्रावधानों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच और न्यायिक कार्यवाही के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
समाचार एजेंसी एएनआई के रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने का अधिकार दिया जाएगा।
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इन विशेष अदालतों में मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर करने का प्रावधान होगा। साथ ही, आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन माह के अंदर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
दो माह में जांच हो पूरी
केंद्र सरकार को गंभीर या कई राज्यों से जुड़े परीक्षा घोटालों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। कानून के तहत, दर्ज अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की बात कही गई है, ताकि जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को रोका जा सके। इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े मामलों की पैरवी के लिए विशेष कानूनी सलाहकार या सरकारी वकील नियुक्त करने का अधिकार भी होगा। साथ ही, नए प्रावधानों में सजा बढ़ाने और सख्त आर्थिक दंड का प्रस्ताव है।
छात्र आंदोलन के बाद सामने आया विधेयक
जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार इस संशोधन विधेयक को संसद में सोमवार को पेश करने की तैयारी में है। सीजेपी और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में 37 दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों की अन्य मांग भी मान ली जिसमें एफआईआर वापस लेना और मुआवजा देना शामिल है।
