Arvind Kejriwal : दिल्ली आबकारी नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। केजरीवाल के खिलाफ अभियोग लगाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जरूरी मंजूरी मिल गई है। कोर्ट ने यह मंजूरी राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की है। बता दें कि जांच एजेंसी ने केजरीवाल के खिलाफ एक पूरक चार्जशीट दाखिल की है। आबकारी केस में कथित भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने गत 26 जून को उन्हें गिरफ्तार किया। दिल्ली के सीएम अभी न्यायिक हिरासत में हैं। कोर्ट 27 अगस्त को पूरक चार्जशीट पर विचार करने वाला है। केजरीवाल चूंकि सीएम हैं इसलिए उन पर अभियोग दर्ज करने से पहले कानूनी मंजूरी जरूरी है।
तिहाड़ जेल में बंद हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल।
सीबीआई को मिला एक सप्ताह का समय
कथित आबकारी घोटाला मामले में ईडी की गिरफ्तारी से केजरीवाल को जमानत मिल गई है। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी के संयोजक की अर्जियों पर सुनवाई आगे के लिए टाल दी। अपनी इस अर्जी में केजरीवाल ने सीबीआई की गिरफ्तारी को चुनौती दी है। साथ ही खुद को रिहा करने की मांग की है। दरअसल, इस मामले में जांच एजेंसी ने एक जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कोर्ट से समय देने की मांग की। इस मांग पर जस्टिस सूर्य कांत एवं जस्टिस उज्जवल भुवन ने केंद्रीय जांच एजेंसी को हलफनामा दायर करने के लिए एक सप्ताह का वक्त दे दिया।5 सितंबर को होगी सुनवाई
केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सीबीआई ने केवल एक याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया है और इसे बृहस्पतिवार रात आठ बजे उन्हें सौंपा गया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि वह एक सप्ताह में जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तारीख तय की। केजरीवाल ने उन्हें जमानत से इनकार किये जाने और मामले में सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के पांच अगस्त के आदेश को चुनौती दी है।
जमानत के लिए निचली अदालत जाने को कहा था
शीर्ष अदालत ने मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने से 14 अगस्त को इनकार कर दिया था और उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को पांच अगस्त को वैध ठहराया था और कहा था कि सीबीआई के कृत्यों में कोई दुर्भावना नहीं है। अदालत ने कहा था कि सीबीआई यह साबित करने में सक्षम रही है कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल कैसे उन गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जो मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद ही गवाही देने का साहस जुटा सके थे। उच्च न्यायालय ने उन्हें सीबीआई मामले में नियमित जमानत के लिए निचली अदालत जाने को कहा था।
21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया
उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए जाने और अप्रैल 2024 में मंजूरी मिलने के बाद ही एजेंसी उनके खिलाफ आगे की जांच में जुटी। अदालत ने कहा था कि अपराध के तार पंजाब तक फैले हुए हैं, लेकिन केजरीवाल के पद के प्रभाव की वजह से महत्वपूर्ण गवाह सामने नहीं आ रहे थे। न्यायाधीश ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही गवाह अपने बयान दर्ज कराने के लिए आगे आए। केजरीवाल को 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था और धनशोधन मामले में निचली अदालत ने 20 जून को उन्हें जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 12 जुलाई को उन्हें धनशोधन मामले में अंतरिम जमानत दे दी थी।
