BRICS Summit 2026: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भारत की अध्यक्षता के विजन को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में पूरा ध्यान चार मुख्य स्तंभों—रेजिलिएंस (Resilience), इनोवेशन (Innovation), कोऑपरेशन (Cooperation), और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पर केंद्रित रहा है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि चुनौतियों को समय रहते पहचानना होगा, और तुरंत कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में वैश्विक दक्षिण का विश्वास बढ़ा है।
BRICS में पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्य देशों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा, मुझे खुशी है कि आप सभी के सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा दृष्टिकोण को एक 'विन-विन' (Win-Win) साझेदारी में बदलने में सफल रहे हैं।
पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा?
- हमने ब्रिक्स देशों के बीच लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया
- महत्वपूर्ण खनिजों का शस्त्रीकरण साझा विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है
- ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, भारत ने चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता
- ब्रिक्स में वैश्विक दक्षिण का विश्वास बढ़ा है
- विश्व में बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है
- संक्रामक रोगों की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए ब्रिक्स प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर सहमति बनी
- आपदा प्रबंधन के लिए, प्रारंभिक चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं
- ब्रिक्स लॉजिस्टिक सप्लाई चेन सहयोग ढांचा हमारी सप्लाई चेन को अधिक विश्वसनीय और लचीला बनाने में मदद करेगा
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026
भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। यह चौथा मौका है जब भारत ने ब्रिक्स की कमान संभाली है (इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में)। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability" रखा गया है।
विस्तारित ब्रिक्स (BRICS+)
इस सम्मेलन में मूल सदस्यों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के साथ नए जुड़े सदस्य देश (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इंडोनेशिया) और पार्टनर देशों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष लगभग 400 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। सम्मेलन के पहले दिन 'नई दिल्ली घोषणापत्र' (New Delhi Declaration) को अपनाया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IMF/World Bank) में बदलाव और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर सर्वसम्मति बनी।
