प. बंगाल में बीजेपी की चुनावी कमान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल ली है। हाल ही में अमित शाह लगातार तीन दिन पश्चिम बंगाल में डटे रहे। इस दौरान उन्होंने नाराज नेताओं से मुलाकात की और संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा की। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की बैठक में मौजूदगी को भी अहम माना जा रहा है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि पार्टी में गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिला स्तर पर ऐसे नेताओं को आगे लाया जाएगा, जो ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बाहर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकें।
बंगाल में बीजेपी की खास रणनीति
नेगेटिव कैंपेन से दूरी, ‘बंगाल अस्मिता’ पर फोकस
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी इस बार टीएमसी के खिलाफ आक्रामक और नकारात्मक प्रचार से दूरी बनाए रखेगी। चुनावी अभियान का केंद्र बिंदु बंगाल अस्मिता और केंद्र सरकार द्वारा राज्य के विकास के लिए किए गए कार्य होंगे। बीजेपी का मानना है कि सकारात्मक एजेंडे से ही मतदाताओं का भरोसा जीता जा सकता है।
मोदी मैदान में, शाह बैकएंड में: दोहरी रणनीति
बीजेपी ने बंगाल में बिहार मॉडल की तर्ज पर दोहरी रणनीति अपनाई है। संगठन और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी अमित शाह संभालेंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी का चेहरा बनकर मैदान में उतरेंगे। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी 17 और 18 जनवरी को पश्चिम बंगाल दौरे पर रहेंगे, जिससे चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी।
पीएम मोदी का बंगाल दौरा: जनसभाएं और विकास का संदेश
17 जनवरी को मालदा और 18 जनवरी को हावड़ा में प्रधानमंत्री की जनसभाएं प्रस्तावित हैं। इसी दौरान हावड़ा रेलवे स्टेशन से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम भी तय है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी चुनाव से पहले और बाद में दर्जनभर से ज्यादा रैलियां कर सकते हैं, जिनके जरिए एक रैली से पांच से आठ विधानसभा सीटों को कवर करने की रणनीति है।
टीएमसी का पलटवार, ‘ममता के पक्ष में पोलराइज्ड बंगाल’ का दावा
बीजेपी की इस आक्रामक तैयारी पर तृणमूल कांग्रेस ने तंज कसा है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बंगाल का वोटर पहले से ही ममता बनर्जी के पक्ष में पोलराइज्ड है और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के दौरे से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
बूथ लेवल पर तैयारी, संगठन को बनाया जा रहा मजबूत
संगठनात्मक मोर्चे पर बीजेपी ने बड़ी तैयारी कर ली है। पश्चिम बंगाल के 82 हजार बूथों में से 71 हजार बूथों पर पार्टी अपनी संरचना मजबूत कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक SIR के बाद बूथों की संख्या बढ़कर 93 हजार तक पहुंच सकती है। पार्टी पुराने काडर के घर जाकर संपर्क साधेगी और हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेगी।
प्रवासी वोटरों पर खास नजर, टीएमसी ने किया दावा खारिज
बीजेपी पूर्वांचली, बिहारी, मारवाड़ी समेत अन्य राज्यों से आए मतदाताओं पर भी फोकस कर रही है। इन समुदायों के परिजनों के जरिए समर्थन मजबूत करने की योजना है। वहीं टीएमसी का कहना है कि बंगाल में ये समुदाय ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं और बीजेपी की रणनीति कामयाब नहीं होगी।
उम्मीदवार चयन में बदलाव, दागी नेताओं और स्टार चेहरों से दूरी
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी इस बार टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट से आए दागी नेताओं को टिकट नहीं देगी। साथ ही टॉलीवुड या टीवी स्टार्स पर भी दांव नहीं खेलेगी
