The Voice of Hind Rajab Release Controversy: ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म द वॉइस ऑफ हिंद रजब की भारत में रिलीज नहीं हो सकी है। इस रिलीज विवाद को लेकर तिरुवनंतपुरम सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की प्रतिक्रिया सामने आई है। शशि थरूर का मानना है कि फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए था। फिल्म देखना अभिव्यक्ति की आजादी है। साथ ही उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी गलती करार दिया।
तिरुवनंतपुरम सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (फाइल फोटो)
'फिल्म पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं'
समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में शशि थरूर ने कहा, ''यह एक बहुत बड़ी गलती है, ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। सच्चाई यह है कि हमारे जैसे लोकतंत्र में फिल्म देखना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है। अगर आप इसे नहीं देखना चाहते, तो मत देखिए, लेकिन फिल्म पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं है, क्योंकि इसका सरकार-से-सरकार के संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर का सख्त संदेश
शशि थरूर ने आगे कहा कि यह फिल्म भारत सरकार ने न तो बनाई है और न इसे प्रायोजित (Sponsor) कर रही है। भारतीयों को यह तय करने का लोकतांत्रिक अधिकार है कि वे फिल्म देखें या नहीं। उन्हें इसमें दखल नहीं देना चाहिए था। जिस कानून के आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि हमें सरकार-से-सरकार संबंधों के बहाने किताबों, फिल्मों या किसी भी चीज पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। विडंबना यह है कि यह फिल्म शायद इजरायल में भी प्रतिबंधित नहीं है।
किस पर आधारित है फिल्म?
ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' एक पांच साल की फिलिस्तीनी बच्ची की कहानी पर आधारित है। इस फिल्म को अब तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफिकेशन यानी सीबीएफ़सी से सर्टिफिकेट नहीं मिला है। दरअसल, यह फिल्म एक डॉक्यू ड्रामा है, जिसे ट्यूनीशियन डायरेक्टर काउथर बेन हानिया ने बनाया है।
