Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill: भाजपा सांसद बैजयंत पांडा को बुधवार को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 की जांच के लिए गठित प्रवर समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, प्रवर समिति में लोकसभा से चुने गए 24 सदस्य होंगे।
भाजपा नेता बैजयंत पांडा (फोटो साभार: @PandaJay)
प्रवर समिति में कौन-कौन है शामिल
बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में बनी प्रवर समिति में डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, डॉ. सीएन मंजूनाथ, मितेश पटेल बकाभाई, अनिल फिरोजिया, डॉ. आनंद कुमार, बिप्लब कुमार देब, डॉ. संजय जयसवाल, सौमित्र खान, कार्ति पी. चिदंबरम, श्रेयस एम. पटेल, रवींद्र वसंतराव चव्हाण, भजन लाल जाटव, नीरज मौर्य, थिरु डीएम कथिर आनंद, सुप्रिया सुले, लवू श्रीकृष्ण देवरायलू, महुआ मोइत्रा, सुनील कुमार, श्रीकांत शिंदे, नवस्कनी के, पीवी मिधुन रेड्डी, डॉ. राजकुमार सांगवान और चंद्र प्रकाश चौधरी शामिल हैं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बैजयंत पांडा को इस विशेष समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने पहले नए इनकम टैक्स बिल की चयन समिति की भी अध्यक्षता की थी। IBC (संशोधन) बिल में दिवालियापन और ऋणशोधन संहिता, 2016 में कई संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिन्हें व्यापक जांच के लिए चयन समिति को सौंपा गया है।
मौजूदा कानून के अनुसार, कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान शुरू करने के लिए आवेदनों को 14 दिनों के भीतर स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह प्रक्रिया औसतन 434 दिन से अधिक लेती है। इस देरी को रोकने के लिए, IBC की धारा 7 को संशोधित करने का प्रस्ताव है ताकि देनदार की चूक के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएं।
कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) को सुगम बनाने के लिए कई सुधार प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें परिसंपत्ति बिक्री की अनुमति के लिए समाधान योजनाओं की परिभाषा का विस्तार, कॉरपोरेट आवेदक की भूमिका को सीमित करना, सरकारी बकाया प्राथमिकता को स्पष्ट करना और CIRP आवेदन वापसी पर कड़ी निगरानी शामिल हैं।
