भारत सरकार ने आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब से हर साल 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। पहले यह दिन धन्वंतरि जयंती (धनतेरस) को मनाया जाता था। सरकार का मानना है कि तय तिथि तय होने से आयुर्वेद दिवस को एक सार्वभौमिक कैलेंडर पर पहचान मिलेगी और दुनिया भर में इसका व्यापक रूप से आयोजन संभव हो सकेगा।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि यह व्यक्ति और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य का विज्ञान है। उन्होंने इस वर्ष की थीम "लोगों और ग्रह के लिए आयुर्वेद" बताते हुए कहा कि यह हमारे सामूहिक संकल्प को दर्शाता है कि आयुर्वेद के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य और स्वस्थ ग्रह की दिशा में काम किया जाएगा।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि 2016 से शुरू हुआ आयुर्वेद दिवस अब एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। आज यह भारत के पारंपरिक ज्ञान का उत्सव ही नहीं, बल्कि दुनिया में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चिंताओं का समाधान भी बन रहा है। एनएसएसओ के सर्वे के मुताबिक, भारत में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में आयुर्वेद को सबसे ज्यादा अपनाया जा रहा है।
पिछले साल यानी 2024 में हुए 9वें आयुर्वेद दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के दूसरे चरण का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही चार उत्कृष्टता केंद्र, 12,850 करोड़ रुपये की लागत वाले स्वास्थ्य प्रोजेक्ट और देश का प्रकृति परीक्षण अभियान भी शुरू किया गया।
आयुर्वेद दिवस 2025 को सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली की बीमारियों, जलवायु जनित रोगों और तनाव जैसी समकालीन चुनौतियों का समाधान बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है।
इस अवसर पर जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य परामर्श, युवा जुड़ाव कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे आयोजन होंगे। खास बात यह है कि पिछले साल करीब 150 देशों में आयुर्वेद दिवस पर गतिविधियां आयोजित हुईं, जो इसकी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती हैं।
