'मैं योगी के खिलाफ नहीं, लेकिन शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन'; अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में उमा भारती की एंट्री

पिछले 10 दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। इस बीच इस मामले में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने भी एंट्री ले ली है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर इन दिनों उत्तर प्रदेश की सियासत गर्म है। अखिलेश और योगी आदित्यनाथ के बीच इस मुद्दे पर ठनी हुई है। इतना ही नहीं कई भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासन के खिलाफ हो गए हैं। इस बीच इस मामले में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने भी एंट्री ले ली है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है।

उमा भारती

उमा भारती

उमा भारती ने क्या लिखा?

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बैक टू बैक दो पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उमा भारती ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना प्रशासन की अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन है। यह अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है।

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