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केजरीवाल को कैंसर और किडनी का खतरा! SC से अंतरिम जमानत बढ़ाए जाने की मांग के बीच आतिशी का बड़ा बयान

Arvind Kejriwal News: आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने बताया कि अरविंद केजरीवाल का कीटोल लेवल काफी बढ़ा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि कीटोन लेवल का अधिक बढ़ना गंभीर बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं। ये किडनी में गंभीर समस्या, यहां तक कि कैंसर के भी लक्षण हो सकते हैं।

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अरविंद केजरीवाल

Photo : Twitter

Arvind Kejriwal News: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत की अवधि एक जून को खत्म हो रही है। उन्हें दो जून को दोबारा सरेंडर करना है। इससे पहले केजरीवाल की ओर से स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की अवधि बढ़ाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल का कीटोन लेवल काफी बढ़ा हुआ है, जिस कारण उन्हें गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। इस बीच आम आदमी पार्टी की नेता व मंत्री आतिशी का बड़ा बयान आया है।

आप नेता आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को किडनी या कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। डॉक्टरों ने बताया है कि उन्हें सभी तरह के टेस्ट कराने की आवश्यकता है। इसलिए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जमानत अवधि को सात दिन बढ़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी डाली है, जिससे ये सारे टेस्ट हो सकें।

आतिशी ने क्या बताया?

दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने बताया कि जब अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था तो उनका वजन एकदम से सात किलो तक घट गया था, यह वजन अभी तक नहीं बढ़ा है। उनका यह वजन क्यों घटा, डॉक्टरों को इसकी वजह अभी तक नहीं पता चली है। डॉक्टरों ने अरविंद केजरीवाल के कुछ टेस्ट कराए हैं, जिसमें उनका कीटोल लेवल काफी बढ़ा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि कीटोन लेवल का अधिक बढ़ना गंभीर बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं। ये किडनी में गंभीर समस्या, यहां तक कि कैंसर के भी लक्षण हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टरों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल को कई सारे टेस्ट कराने की जरूरत है, इसलिए जमानत को सात दिन आगे बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी 21 दिन की अंतरिम जमानत

बता दें, शराब नीति मामले में गिरफ्तार अरविंद केजरीवाल को शीर्ष अदालत ने 10 मई को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रचार करने के लिए एक जून तक यानी 21 दिन की अंतरिम जमानत दी थी, जिसके अनुसार उन्हें दो जून को जेल लौटना है। उसने साथ ही कहा था कि केजरीवाल इस दौरान अपने कार्यालय या दिल्ली सचिवालय नहीं जा सकते और ना ही किसी भी सरकारी फाइल पर तब तक हस्ताक्षर कर सकते हैं, जब तक उपराज्यपाल की मंजूरी प्राप्त करने के लिए ऐसा करना आवश्यक न हो।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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