Manipur Violence Updates: क्या मणिपुर की तस्वीर लेबनान और सीरिया की तरह हो गई है। दरअसल सेना से रिटॉयर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एल निशिकांत सिंह ने ट्वीट करते हुए एसओएस मैसेज भेजते हुए लिखा कि वो मणिपुर से आने वाले एक सामान्य भारतीय हैं जो अवकाश वाली जिंदगी जी रहे हैं। इस समय राज्य, राज्यविहीन है। जीवन और संपदा पर कोई भी किसी भी समय हमला कर सकता है जिस तरह से लेबनाव, नाइजीरिया और सीरिया में हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। कोई है जो उनकी बात सुन रहा है। इसके साथ ही उन्होंने 15 रुपए के स्टैंप को भी अपने ट्वीट में शामिल किया है जिस पर लिखा है कि युद्ध की भी सीमाएं होती हैं। उनके ट्वीट पर रिटायर्ड आर्मी चीफ वी पी मलिक ने ट्वीट किया कि रिटार्यड लेफ्टिनेंट जनरल की तरफ से यह एक असाधारण दुख भरी पुकार है। मणिपुर में हालात पर नियंत्रण के लिए उच्च स्तर पर दखल देने की जरूरत है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को टैग भी किया।
हिंसा में शामिल लोग बिल्कुल अमानवीय
इंफाल घाटी के मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग के खिलाफ जनजातीय एकजुटता मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं।मणिपुर के बाहर हजारों लोगों के शरणार्थी शिविरों में होने की सूचना है और लाखों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को विस्थापित किया गया है।मणिपुर में कोई भी सुरक्षित नहीं है, यह तथ्य गुरुवार को एक केंद्रीय मंत्री के घर और एक दिन पहले एक राज्य मंत्री के घर पर हुए हमले से स्पष्ट था।इंफाल में केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर में गुरुवार रात भीड़ ने तोड़फोड़ की और आग लगा दी। गुरुवार की रात करीब 11 बजे भीड़ मंत्री रंजन सिंह के आवास में जबरदस्ती घुस गई और उनकी संपत्ति में आग लगाने का प्रयास किया। आरके रंजन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि आवासीय गेट पर तैनात गृह रक्षक भीड़ के प्रवेश को रोकने में असमर्थ थे। उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि मेरे गृह राज्य में क्या हो रहा है। मैं अब भी शांति की अपील करता रहूंगा। इस तरह की हिंसा में शामिल लोग बिल्कुल अमानवीय हैं।
