Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय में अंकिता की हत्या के मामले में तीन दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को सजा सुनाई। कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले तीनों को विभिन्न धारा में दोषी सिद्ध किया गया। अंकिता की हत्या 2022 में हुई थी और उसका शव नहर से बरामद हुआ था। कोर्ट ने आज ही तीनों को दोषी करार दिया और अब सजा का एलान भी कर दिया गया।
अंकिता भंड़ारी केस के 3 आरोपी दोषी करार
इससे पहले पीड़िता की मां देवी ने कहा कि अपराधियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए...मैं उत्तराखंड की जनता से अपील करती हूं कि वे हमारा समर्थन करते रहें और हमारा मनोबल बढ़ाने के लिए कोटद्वार अदालत आएं।
जानकारी के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल जिले में न्यायालय परिसर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण क्षेत्र छावनी जैसा नजर आ रहा है। पौड़ी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) लोकेश्वर सिंह ने बताया कि जिले और अन्य स्थानों से पुलिस बल तैनात किया गया है तथा न्यायालय की 100 मीटर की परिधि को शून्य क्षेत्र घोषित किया गया है, तथा केवल सरकारी कर्मचारियों और न्यायालय में उपस्थित होने वाले व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है।
अंकिता ऋषिकेश के वनतंत्रा रिसॉर्ट में करती थी काम
पौड़ी जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के वनतंत्रा रिसॉर्ट में काम करती थी। आरोप है कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके साथियों सौरभ भास्कर और अंकित ने अंकिता की बैराज में धक्का देकर हत्या कर दी। अंकिता भंडारी का शव 24 सितंबर को ऋषिकेश में चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। अधिकारियों को उसका शव मिलने से कम से कम छह दिन पहले उसे लापता बताया गया था। पुलिस उप महानिरीक्षक पी रेणुका देवी की अध्यक्षता वाली एसआईटी शुरू में मामले की जांच कर रही थी। मामले की पहली सुनवाई 30 जनवरी 2023 को कोटद्वार स्थित एडीजे कोर्ट में शुरू हुई थी। एसआईटी जांच के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से इस हत्याकांड को लेकर 500 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के तीनों आरोपियों वनतंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य , उसके कर्मचारी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष की गवाही 28 मार्च 2023 से शुरू हुई थी। करीब दो साल आठ महीने चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से विवेचक समेत 47 गवाहों की कोर्ट में पेशी हुई। हालांकि, एसआईटी ने इस मामले में 97 गवाह बनाए थे, जिनमें से सिर्फ 47 अहम गवाह ही कोर्ट में पेश किए गए।
