BRICS Summit 2026 Amitabh Kant Interview: भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के अवसर पर नीति आयोग के पूर्व CEO और भारत के पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने टाइम्स नाउ नवभारत से विशेष बातचीत की। इस साक्षात्कार में उन्होंने वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics), वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के संकट, चीन द्वारा क्लीन टेक्नोलॉजी के वेपनाइजेशन और अमेरिकी नीतियों की अनिश्चितता के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति का विस्तृत ब्योरा दिया।
क्या BRICS तोड़ पाएगा अमेरिका का वर्चस्व? पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने बताया भारत का विजन, कहा- 'हम एंटी-वेस्ट नहीं...'
विस्तार के बाद 'जॉइंट डिक्लेरेशन' लाना बड़ी चुनौती, लेकिन भारत सफल होगा
अमिताभ कांत के अनुसार, ब्रिक्स में नए सदस्यों (ईरान, यूएई, सऊदी अरब आदि) के शामिल होने के बाद सभी देशों को एक संयुक्त घोषणा-पत्र (Joint Declaration) पर सहमत करना चुनौतीपूर्ण है।
कंसेंसस (सहमति) की आवश्यकता: उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय मंचों में सभी सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होती है। जिस तरह भारत ने G20 में 300 घंटे की बैठकों और 16 ड्राफ्ट्स के बाद सर्वसम्मति बनाई थी, उसी कूटनीतिक महारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ब्रिक्स 2026 में भी सर्वसम्मत घोषणा-पत्र जारी कराने में सफल रहेगा।
वैश्विक तनाव: यूरोप में जारी संघर्ष, मध्य पूर्व के हालात और रेड सी/स्ट्रेट्स में सप्लाई चेन की रुकावटों के कारण जिओ-इकोनॉमिक्स काफी जटिल हो गया है।
चीन और अमेरिका की 'मोनोपोली' के बीच संतुलन
अमिताभ कांत ने दो प्रमुख वैश्विक शक्तियों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों का विश्लेषण प्रस्तुत किया:
चीन का क्लीन टेक पर दबदबा: चीन वर्तमान में दुनिया की 95% क्लीन बैटरियों, 90% क्रिटिकल मिनरल्स, 85% सोलर विनिर्माण और 75% पवन ऊर्जा क्षमता को नियंत्रित करता है। वह प्रायः बैटरी सेल्स के दाम बढ़ाकर या क्रिटिकल मिनरल्स को रोककर तकनीक को 'वेपनाइज' करता है और गैर-टैरिफ बाधाएं लगाता है।
अमेरिका का फॉसिल फ्यूल पर नियंत्रण: दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के लगभग एक-तिहाई फॉसिल फ्यूल उत्पादन को नियंत्रित करता है और वेनेजुएला जैसे देशों के तेल उत्पादन पर प्रभाव रखता है।
भारत की रणनीति: भारत को वर्ष 2047 तक $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिए क्लीन टेक्नोलॉजी में चीन के साथ आर्थिक व औद्योगिक सहयोग करना होगा (जैसे प्रेस नोट 2 के तहत 10% तक बेनेफिशियल ओनरशिप), जबकि अपनी विनिर्माण (Make in India) क्षमता को सुरक्षित रखना होगा।
'डीडोलराइजेशन' पर भारत का स्पष्ट रुख
अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने की चर्चाओं पर अमिताभ कांत ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य जानबूझकर 'एंटी-अमेरिकन' या 'एंटी-वेस्टर्न' रुख अपनाना नहीं है।
अस्थिर अमेरिकी नीतियां: ट्रंपियन नीतियों और अमेरिकी प्रतिबंधों की अनिश्चितता के कारण दुनिया के देश खुद-ब-खुद स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों की ओर बढ़ रहे हैं।
मल्टी-अलाइनमेंट: भारत का रुख डीडोलराइजेशन का झंडा उठाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। भारत अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) पर काम कर रहा है और साथ ही ब्रिक्स व चीन के साथ व्यापारिक संतुलन स्थापित कर रहा है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (BRICS Bank) की बढ़ती भूमिका
अमिताभ कांत ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स का न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) आने वाले समय में हरित प्रौद्योगिकियों (Green Technologies) के प्रसार और जलवायु वित्तपोषण (Climate Finance) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैश्विक वित्तीय संस्थान बनकर उभरेगा।
