लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन पर चर्चा शुरू हो गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अपना संबोधन दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश लंबे समय से नक्सलग्रस्त था। पीएम मोदी के शासन काल में कई काम हुए हैं। हमारी सरकार में नक्सवाल मुक्त भारत की रचना भी साकार हुई है, पुरानी सरकारों के समय में ये काम क्यों नहीं हुआ?
लोकसभा में अमित शाह।
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष का आभार जताया। उन्होंने कहा कि आज यहां 1970 से 2026 तक की घटनाओं की एक श्रृंखला के संबंध में संसद में आखिरकार चर्चा हो रही है, जिसका हमारे राष्ट्र और हम सभी के लिए गहरा महत्व है।
जवानों को दिया नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का श्रेय
उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का श्रेय जवानों को देते हुए कहा कि हमारे, CAPF,सीआरपीएफ के जवान कोबरा फोर्स के जवान, स्टेट की पुलिस और आदिवासियों के सपोर्ट से ये सम्भव हुआ है। उन्होंने कहा कि हम एक लोकतंत्र में रहते हैं। हमने इस देश के संविधान को अपनाया है... यह ऐसी सरकार नहीं है जो किसी की धमकियों के आगे झुक जाए। यह सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त
उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के हर गांव में स्कूल स्थापित करने का अभियान चलाया गया। क्षेत्र के हर गांव में राशन की दुकान खोलने का अभियान चलाया गया। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं और अब उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। मैं यहां नक्सलवाद का समर्थन करने वालों से बस इतना पूछना चाहता हूं, लोगों को ये लाभ अब तक क्यों नहीं मिले?... बस्तर के लोग पीछे इसलिए रह गए क्योंकि 'लाल आतंक' का साया इस क्षेत्र पर मंडरा रहा था; इसीलिए विकास उन तक नहीं पहुंच पाया। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है।
जो भी हथियार उठाएगा, उसका हिसाब होगा- अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि जो लोग अन्याय के खिलाफ लड़ने का दावा करते हुए सशस्त्र आंदोलन की वकालत कर रहे हैं, उनसे मैं पूछता हूं: क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? अगर किसी के साथ अन्याय होता है, तो अदालतें स्थापित की गई हैं; विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसील गठित की गई हैं। मैं कहना चाहता हूं कि वह युग समाप्त हो गया है। यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है; वह सभी शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह ने कहा कि कांग्रेस के लोग चिल्ला रहे थे कि आदिवासी का विकास नहीं हुआ, आपने ये नहीं बताया की 60 साल आपने राज किया तब विकास क्यों नहीं हुआ? आज आप हिसाब मांग रहे हो?मनमोहन सिंह जी ने देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट से भी बड़ी चुनौती देश के सामने नक्सलवाद है, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। आज मोदी सरकार की सबसे बड़ी सिद्धि नक्सल-मुक्त भारत है; यह कोई भी रिसर्चर स्वीकार करेगा।
इंदिरा गांधी से मनमोहन सिंह तक सबको घेरा
वामपंथी विचारधारा के कारण ये नक्सलवाद फैला है, राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने भी स्वीकार की थी। मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की तुलना में भी देश में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवादी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अमित शाह ने कहा कि 2014 में परिवर्तन हुआ और मोदी जी के शासन में कई सारी वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ। धारा 370 हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बना, जीएसटी इस देश में आज वास्तविकता बनकर आया है, सीएए का कानून आ गया है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है... इस तरह कई सारे बड़े काम मोदी जी के नेतृत्व में हुए हैं।
इंदिरा जी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए अपनाया वामपंथी विचारधारा
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं है। यह एक विचारधारा है, एक ऐसी विचारधारा जिसे इंदिरा जी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए अपनाया था। नक्सलवाद ठीक इसी वामपंथी विचारधारा के कारण फैला है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के तीन जिले सहित 12 राज्य प्रभावित हुए। एक पूर्ण 'रेड कॉरिडोर' बन गया और वहां कानून का राज खत्म हो गया। 12 करोड़ लोग वर्षों तक गरीबी में रहे और किसी ने कोई चिंता नहीं दिखाई। हजारों युवा अपनी जानें गंवा बैठे। कई लोग जीवन भर के लिए स्थायी रूप से विकलांग या अपंग हो गए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
नक्सलवादियों ने रेड कॉरिडोर इसलिए चुना क्योंकि वहाँ सरकार की उपस्थिति कमज़ोर थी
अमित शाह ने कहा कि 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, तब हमारे पास संसाधन बेहद सीमित थे। देश में विकास के स्पष्ट संकेत नहीं थे। करीब दो सौ वर्षों की गुलामी ने भारत की अर्थव्यवस्था, प्रशासन और बुनियादी ढांचे को कमजोर कर दिया था। उस समय राजनीति भी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सिमटी हुई थी। संसाधन और राजस्व दोनों कम थे, इसलिए विकास एकसमान रूप से सभी हिस्सों तक नहीं पहुँच पाया। सड़कें बननी थीं, लेकिन पूरा देश एक साथ नहीं जुड़ सका। कई इलाके ऐसे थे जहाँ राज्य की मौजूदगी बहुत कमजोर थी। ऐसे में अगर राज्य की पहुँच ही नहीं थी, तो सुनियोजित भेदभाव का माहौल पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता। सच्चाई यह है कि नक्सलवादियों ने रेड कॉरिडोर इसलिए चुना क्योंकि वहाँ सरकार की उपस्थिति कमज़ोर थी। उन्होंने भोले-भाले आदिवासियों को बहकाया, उन्हें भ्रमित किया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए।
भोले-भाले आदिवासियों को निशाना बनाया
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि वामपंथियों ने अपनी विचारधारा फैलाने के लिए भोले-भाले आदिवासियों को निशाना बनाया। उनका मानना था कि यदि आदिवासी पढ़-लिख जाएंगे तो उनके प्रभाव में नहीं रहेंगे। इसी सोच के तहत उन्होंने स्कूलों को जलाया, ग्राम विकास को रोका और क्षेत्र को जानबूझकर पिछड़ा रखा।वामपंथी उग्रवादियों ने वर्षों तक विकास को इन इलाकों तक पहुँचने ही नहीं दिया। लेकिन आज नरेंद्र मोदी सरकार में वही विकास घर-घर पहुँच रहा है। अमित शाह ने कहा कि गरीबी नक्सलवाद का कारण नहीं बनी, बल्कि नक्सलवाद ने ही इस क्षेत्र में गरीबी को गहरा किया। नक्सलवाद की जड़ें गरीबी में नहीं, बल्कि हिंसा और भ्रम फैलाने की विचारधारा में हैं।
ये अपने आदर्श भी विदेश से इंपोर्ट करते हैं- शाह
अमित शाह ने कहा कि उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वामपंथियों ने आदिवासियों को बरगलाया उन्हें हथियार थमाया। नक्सलियों का कोई भी आइडल भारतीय नहीं है, ये माओ को आइडल मानते हैं। क्या है माओवादी विचारधारा? हमें सिखाया गया है ‘सत्यमेव जयते’, यानी सत्य की हमेशा विजय होती है। इनका ध्रुव वाक्य है- ‘सत्ता बंदूक की नली से निकलती है’। इनके आदर्श देखिए, हमारे 10 हज़ार साल के इतिहास में कितने महान महापुरुष हुए हैं। इन्होंने तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा, भगत सिंह और सुभाष बाबू को आदर्श नहीं माना; इन्होंने माओ को अपना आदर्श माना। ये अपने आदर्श भी विदेश से इंपोर्ट करते हैं।
भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना गलत
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनका (नक्सलियों का) लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है। यहां कई लोगों ने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन आपकी लड़ाई का तरीका क्या है? हम अब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं रह रहे हैं। कुछ लोगों ने तो भगत सिंह और बिरसा मुंडा से उनकी तुलना करने तक की कोशिश की है। यह कितनी बेशर्मी है? आप भगत सिंह और बिरसा मुंडा जैसे शहीदों, विशेष रूप से भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी, की तुलना उन लोगों से कर रहे हैं जो संविधान का उल्लंघन करते हैं, हथियार उठाते हैं और निर्दोष लोगों का कत्लेआम करते हैं? ऐसे गंभीर मामलों पर विचार करते समय संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठना जरूरी है।
