Amritpal Singh : गत दो 2 मार्च को एक अहम घटना हुई, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कहने पर भगवंत मान दिल्ली आए और अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा है कि उसी मुलाकात में अमित शाह ने एक्शन की आखिरी रूपरेखा तय की, अमित शाह का इशारा मिलते ही सेंट्रल एजेंसियां काम में जुट गई, पंजाब पुलिस भी एक्शन में आ गई। दरअसल, 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख एवं खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने गत 23 फरवरी को अजनाला के थाने पर बंदूकों और तलवारों से हमला कर दिया। हिंसक झड़प में छह पुलिसकर्मी और कुछ अमृतपाल के समर्थक भी जख्मी हुए हैं। ये सभी अमृतपाल के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की रिहाई के लिए प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
अमृतपाल का इतिहास
यहां अमृतपाल का इतिहास जानना जरूरी है। अमृतपाल सिंह करीब सात महीने पहले दुबई से लौटा और आते ही खालिस्तानी समर्थकों का हीरो बन गया।
30 साल का अमृतपाल सिंह अमृतसर के एक छोटे से गांव जल्लूपुर खेड़ा गांव का रहने वाला है। इसने अपने पैतृक गांव में ही 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद इसने कपूरथला में पॉलिटेक्निक की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला लिया। फिर 2012 में ये अपने परिवार का ट्रांसपोर्ट बिजनेस संभालने के लिए दुबई चला गया। वहां इसकी दिलचस्पी खालिस्तान आंदोलन में बढ़ने लगी, खालिस्तान के समर्थन में इसने कई वीडियो भी बनाए और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए
सितंबर 2022 में वापस भारत आ गया
इसके बाद अमृतपाल सिंह सितंबर 2022 में वापस भारत आ गया और खुलेआम खालिस्तान और अलगाव की बातें करना शुरू कर दिया। सितंबर में भारत लौटने के बाद अमृतपाल खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले के गांव गया जिसका ऑपरेशन ब्लू स्टार में एनकाउंटर किया गया था, तभी से इसकी तुलना जरनैल सिंह भिंडरावाले से की जा रही है। 29 सितंबर को मोगा जिले के रोडे गांव में अमृतपाल ने 'वारिस पंजाब दे' की पहली वर्षगांठ पर एक कार्यक्रम किया था। इस संगठन को पंजाबी सिंगर और एक्टर दीप सिद्धू ने शुरू किया था, पहले इस नाम से एक म्यूज़िक एल्बम बनाई थी।
दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत
दीप सिद्धू की पिछले साल 15 फरवरी को एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। हालांकि दीप सिद्धू का संगठन खालिस्तान के समर्थन में नहीं दिखाई दिया,
। हैरानी बात ये भी है कि अमृतपाल कभी भी दीप सिद्धू से नहीं मिला और दीप सिद्धू का परिवार भी कह चुका है कि वारिस पंजाब दे संगठन पर कब्जा किया गया है। सिंतबर में वारिस पंजाब दे को हाईजैक करने के बाद अमृतपाल ने इसे खालिस्तानी आंदोलन से जोड़ दिया और इसी संगठन के नाम से भिंडरावाले के गांव में कार्यक्रम किया ताकि लोगों को ये मैसेज पहुंच जाए कि वारिस पंजाब दे एक खालिस्तान समर्थक संगठन हैं।
एक्शन की क्रेडिट लेने की होड़
अमृतपाल पर एक्शन हुआ तो इसे लेकर अब क्रेडिट लेने की होड़ लग गई है लेकिन असल में अमृतपाल पर एक्शन कैसे शुरू इसके पीछे की कहानी समझने के लिए आपको पूरी टाइमलाइन समझनी होगी। 4 मार्च 2022 - दीप सिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल ने खुद को 'वारिस दे पंजाब' का घोषित किया। सितंबर 2022 - दुबई से भारत आया और पंजाब में बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन करने लगा। अक्टूबर 2022 - राजस्थान में बड़ा समारोह किया, घर वापसी जैसे कार्यक्रम चलाए। इसी दौरान गोली-बंदूक की बात करने लगा, बदला लेने की बात करने लगा, खालिस्तान की बात करने लगा। 21 फरवरी 2023 को उसने अमित शाह को धमकी दी, इंदिरा गांधी जैसा अंजाम होगा।
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर पहले से था अमृतपाल
इस वक्त तक पंजाब पुलिस अमृतपाल के सामने सरेंडर करती नजर आ रही थी, पुलिस स्टेशन पर हमले के अगले ही दिन पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के सहयोगी तूफान सिंह को अपहरण केस में रिहा कर दिया था, यही वो वक्त था जब अचानक से पूरे देश में अमृतपाल की चर्चा होने लगी, लोग जानने लगे कि हां कोई अमृतपाल भी है जिस पर एक्शन लेने पर पंजाब पुलिस भी कतरा रही है लेकिन केंद्रीय सिक्योरिटी एजेंसियों के रडार पर अमृतपाल बहुत पहले से था, केंद्रीय एजेंसियां 4-5 महीने पहले से ही अमृतपाल के खिलाफ डोजियर बना रही थी, उसके मूवमेंट पर नजर रख रही थी, उसके भाषण और कनेक्शन की डिटेल जुटा रही थी।
हथियार, जिंदा कारतूस बरामद
विपक्षी दल पंजाब में कानून व्यवस्था के मुद्दे को उठा रहे हैं। सरकार पर हमला कर रहे हैं। पंजाब में लोग अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के क्राइम कंट्रोल मॉडल को याद कर रहे हैं। सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने अपने बेटे की पहली बरसी पर कहा कि आज लोग यूपी के सीएम योगी को याद कर रहे हैं। बलकौर सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में लोग योगी को वोट दने के लिए मजबूर हो जाएंगे। पंजाब पुलिस ने अमृतपाल की एक कार बरामद की है। इस कार से पुलिस को हथियार मिले हैं। 57 राउंड जिंदा कारतूस भी मिली हैं और एक वॉकी टॉकी मिला है।
उन्होंने बताया कि उक्त लावारिस गाड़ी में से एक .315 बोर राइफल समेत 57 जिंदा कारतूस, एक तलवार और एक वॉकी-टॉकी सेट बरामद किया गया है. उन्होंने बताया कि यह गाड़ी मनप्रीत सिंह निवासी गांव अनोखरवाल, एसबीएस नगर की है, जिसको गिरफ़्तार किया जा चुका है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्सेज की कंपनियों की तरफ से राज्य भर में सांझे तौर पर सीपीज़/ एसएसपी के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया. नागरिकों को शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील करने के लिए राज्य के सभी जिलों में सिविल प्रशासन और पंजाब पुलिस की तरफ से सांझे तौर पर शांति कमेटी मीटिंग की गई.
सुरक्षा एजेंसियों ने अमृतपाल की जो कुंडली तैयार की है उसके मुताबिक
- अमृतपाल नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में युवाओं को भड़का रहा है, और इसकी आड़ में खालिस्तान के सपने को हवा दे रहा है
- जिस मर्सडीज में अमृतपाल चलता था वो भी उसे ड्रग्स माफिया ने दी है
- नशा मुक्ति केंद्र में अमृतपाल अपनी खुद की प्राइवेट आर्मी तैयार कर रहा था
- नशा मुक्ति केंद्र और अपने गांव के गुरुद्वारे में अमृतपाल अवैध हथियारों को जमा कर रहा था
- अमृतपाल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी लिंक मिले हैं, ISI की मदद से ही अमृतपाल ड्रग्स का रैकेट चला रहा था
- वारिस दे पंजाब संगठन के लोग नशा मुक्ति केंद्र में आने वाले लोगों का पुलिस, सरकारी मशीनरी के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन करने पर मजबूर करते थे
- अमृतपाल के पंजाब आने के बाद से पंजाब से ड्रोन के जरिये ड्रग्स भेजने के मामले बढ़ गए थे,
- हैरानी की बात ये है कि अमृतपाल के नशा मुक्ति केंद्र में कोई डॉक्टर ही नहीं था
- अमृतपाल पाकिस्तान में ड्रग्स का रैकेट चलाने वालों के संपर्क में था
सूत्रों से ये भी खुलासा हुआ है कि
- अमृतपाल को पाकिस्तान की ISI हथियार मुहैया करा रही थी
- भारत आने से पहले जॉर्जिया में ISI ने उसे ट्रेनिंग दी थी
- अमृतपाल पंजाब में फिर से आतंकवाद को बढ़ावा देने के मकसद से भारत आया था
- पंजाब में अमृतपाल ISI के इशारे पर आतंकियों की फंडिंग, उन्हें पनाह देने का काम भी कर रहा था
- अमृतपाल के US में बसे खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस के साथ भी लिंक है, वो सोशल मीडिया पर सिख फॉर जस्टिस के लिए कैंपेन कर चुका है
- अमृतपाल जब दुबई में रह रहा था तभी वो ISI एजेंट के संपर्क में आया, ISI ने उसे पैसे का लालच देकर अपना मोहरा बनाया
ये भी खुलासा हुआ है कि अमृतपाल धर्म की आड़ में 'मानव बम' तैयार कर रहा था
अजनाला में पुलिस स्टेशन पर हुई हिंसा को अमृतपाल सिख धर्म की जीत बता रहा थाअमृतपाल युवाओं को 'खाड़कू' या मानव बम बनाने के लिए उकसा रहा था
अमृतपाल सिख युवाओं को दिलावर सिंह के रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहा था, मृत आतंकवादी दिलावर सिंह ने आत्मघाती हमला कर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की थी
अमृतपाल मारे गए खालिस्तानी आतंकियों के कथित समागम में शामिल होता था, जहां वह उन्हें पंथ का तथाकथित शहीद करार देता था और हथियारों के इस्तेमाल का महिमामंडन करता था
वो बार-बार सिख धर्म की बात करता था, कुर्बानी की बात करता था, वो पंजाब के युवाओं को ये कहकर भड़काता था कि सिख धर्म को हिन्दुस्तान में दबाया जा रहा है
अमृतपाल के एजेंडे में दो नैरेटिव थे, पहला सिख और हिन्दुओं के बीच दरार पैदा करो दूसरा..सिख और ईसाइयों के बीच दरार पैदा करो, वो धर्म के नाम पर सांप्रदायिक माहौल खराब करने की भी साजिश रच रहा था
अमृतपाल के खिलाफ जांच करते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अमृतपाल के बॉस का भी पता चल गया है, अमृतपाल के पीछे कौन लोग है इसकी जानकारी मिली है, सूत्रों के मुताबिक इसमें चार किरदार हैं-
- पहला - यूके बेस्ट खालिस्तानी आतंकी अवतार सिंह खांडा
- दूसरा - परजीत सिंह पम्मा जो प्रतिबंधित संगठन
- बब्बर खालसा इंटरनेशनल जुड़ा हुआ है, वो खालिस्तान टाइगर फोर्स का भी सदस्य है। एनआईए की मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में है
- तीसरा - इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का प्रमुख लखबीर सिंह रोडे भी अमृतपाल का करीबी है,
- लखबीर सिंह भारत में हथियारों की तस्करी के मामले में वॉन्टेड है
- चौथा - गुरपतवंत सिंह पन्नू, खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस का सरगना
- सूत्रों से पता चला है कि इन चारों के इशारे पर अमृतपाल पंजाब को अस्थिर करने की साजिश रच रहा था, अमृतपाल इन्हीं के इशारे पर काम कर रहा था।
