Maharashtra Politics: बीते दो सालों में महाराष्ट्र एक ऐसे राज्य के तौर पर उभरा है, जहां सबसे ज्यादा सियासी घटनाक्रम हुए हैं। पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना टूटी और अब शरद पवार की NCP। भले ही प्रत्यक्ष तौर पर यह दिखाई दे रहा हो कि इन दो बड़े सियासी घटनाक्रमों के बाद शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और अब अजित पवार को बड़ा फायदा हुआ हो, लेकिन इन सभी बातों के पीछे BJP की सियासत छिपी है।
पहले तो एकनाथ शिंदे की बगावत से BJP ने विधानसभा में अपना दावा मजबूत किया और अब NCP की टूट को आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालिया, सियासी भूचाल से जो बातें निकल कर सामने आ रही हैं। उसमें पहली यह है कि एनसीपी में टूट से शरद पवार का महाराष्ट्र की सियासत में कद घटा है, जिसका सीधा असर लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। वहीं, दूसरी यह कि भाजपा ने एकनाथ शिंदे के बढ़ते कद को थामने का प्रयास किया है।
पांच प्वाइंटस में समझते हैं भाजपा का महाराष्ट्र में 'मिशन लोकसभा' क्या है? और हालिया घटनाक्रम से उसे कैसे फायदा हो रहा है?
1. भाजपा के सामने नया विकल्प
अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा कद रखते हैं। शरद पवार के बाद वह एनसीपी के सबसे बड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे और एक साथ नौ विधायकों को शिंदे सरकार में मंत्रि पद मिलना भी इस बात का प्रमाण है कि भाजपा उनके कद से वाकिफ है। हालांकि, राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अजित की बगावत का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी के होता दिख रहा है। अजित की बगावत से जहां एकनाथ शिंदे की बढ़ती लोकप्रियता को थामने का प्रयास किया गया है, तो भाजपा को अब महाराष्ट्र के सियासी जमीन पर नया विकल्प भी मिल गया है।
2. शरद पवार की ताकत कम हुई
2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव में एनसीपी के जरिए शरद पवार भाजपा का महाराष्ट्र में बड़ा नुकसान कर सकते थे। हालांकि, भाजपा ने अजित पवार को अपने खेमे में खड़ा करके उनकी ताकत को कम करने का प्रयाास किया है। अब लोकसभा चुनाव में उसे एक नया पार्टनर मिल गया है, जिसका फायदा वह एनसीपी का बड़ा वोटबैंक अपने पक्ष में करने में उठा सकती है।
3. विपक्षी एकता को झटका
यह ऐसा समय है, जब विपक्षी महागठबंधन का शोर तेजी से सुनाई दे रहा है। महाराष्ट्र के हालिया घटनाक्रम को विपक्षी एकता पर प्रहार के रूप में भी देखा जा रहा है। शरद पवार इस गठबंधन के बड़े चेहरे के तौर पर जाने जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा ने अपनी इस चाल से विपक्षी एकता को भी बड़ा झटका दिया है। अब शरद पवार की पार्टी ही दो फाड़ हो चुकी है और उनके साथ भी वही स्थिति हो गई है, जो एक साल पहले उद्धव ठाकरे की हुई थी।
4. कांग्रेस के लिए भी चुनौती
कांग्रेस के लिए यह एक ऐसा समय है, जब पार्टी देश भर में अपनी खोई जमीन तलाशने का भरपूर प्रयास कर रही है। कई राज्यों में उसे सफलता भी मिली है, जिसने भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है। महाराष्ट्र में कांग्रेस का एनसीपी और उद्धव ठाकरे खेमे के साथ गठबंधन है। यह गठबंधन लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुसीबत बन सकता था। हालांकि, अब एनसीपी में में आई दरार का फायदा भाजपा को होता दिख रहा है, जिसने कांग्रेस के भी चुनौती खड़ी कर दी है।
5. फडणवीस का कद बढ़ेगा
उद्धव ठाकरे से बगावत करके जब एकनाथ शिंदे राज्य के मुख्यमंत्री बने तो भाजपा ने वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाया। हालांकि, सरकार के चेहरे के तौर पर फडणवीस ही आगे दिखाई देए। इस स्थिति को एकनाथ शिंदे ने भांप लिया और कुछ ऐसे निर्णय लिए, जिसे अपने ही सहयोगी फडणवीस को चुनौती के रूप में देखा गया। शिवसेना की ओर से हालिया विज्ञापन विवाद इसका ताजा उदाहरण भी है। ऐसे में भाजपा ने महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार को शामिल कराया, जिसके बाद पवार और फडणवीस की जोड़ी शिंदे के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
