Delhi Services Ordinance: दिल्ली में शक्तियों के बंटवारे से संबंधित केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी को कांग्रेस का साथ मिल सकता है। विपक्षी एकता की दूसरी बैठक से पहले पार्टी की ओर से इसको लेकर बड़ा फैसला किया गया है। बिना नाम लिए कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह अध्यादेश के मुद्दे पर सदन के अंदर व बाहर दिल्ली सरकार के साथ खड़ी हो सकता है। पार्टी ने कहा है कि वह केंद्र सरकार द्वारा राज्यपालों के माध्यम से संघीय ढांचे पर हो रहे हमले को मुद्दे को संसद में उठाएगी।
अध्यादेश विवाद पर आप का साथ दे सकती है कांग्रेस
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा राज्यों में निर्वाचित सरकारों के संघीय ढांचे पर किसी भी हमले का विरोध किया है और वह ऐसा करना जारी रखेगी। खास बात यह है कि पार्टी की ओर से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब 17 व 18 जुलाई को बेंगलुरू में विपक्षी एकता की बैठक प्रस्तावित है और 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है।
आम आदमी पार्टी की ओर से दी जा चुकी है धमकी
बता दें, आम आदमी पार्टी वाली दिल्ली सरकार लगातार कांग्रेस से अध्यादेश मुद्दे पर स्पष्टता का अनुरोध कर रही है। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पटना में हुई बैठक में यहां तक कहा था कि अगर अध्यादेश विवाद पर कांग्रेस उसका समर्थन नहीं करती है तो वह अगली बैठक से दूरी बना लेगी। ऐसे में कांग्रेस ने समर्थन देने का संकेत दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरू में प्रस्तावित बैठक में कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना फैसला सुना सकती है।
मानसून सत्र में इन मुद्दों को उठाएगी पार्टी
बता दें, शनिवार को कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक हुई। इसमें आगामी मानसून सत्र को लेकर चर्चा हुई। पार्टी की ओर से कहा गया है कि राज्यपालों के माध्यम से देश के संघीय ढांचे पर किए जा रहे हमले को संसद में उठाया जाएगा। इसके अलावा पार्टी मणिपुर हिंसा, बालासोर ट्रेन हादसा, जीएसटी, मुद्रास्फीति जैसे मुद्दों पर सरकार का घेराव करेगी।
क्या है अध्यादेश विवाद
केंद्र सरकार की ओर से 19 मई को एक अध्यादेश लाया गया था। इसके माध्यम से दिल्ली की चुनी हुई सरकार की शक्तियों को कम कर दिया गया। जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित सेवाओं को छोड़कर, दिल्ली में सेवाओं का नियंत्रण निर्वाचित सरकार के पास रहेगा। केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अरविंद केजरीवाल देशव्यापी दौरे पर गए और दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए गैर-भाजपा दलों से मुलाकात की।
