राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन हलफनामा दाखिल कर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया है। केंद्र ने अदालत को बताया कि परीक्षा में धांधली रोकने के लिए एक तरफ कानून को और सख्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की गई है, जो तीन महीने के भीतर परीक्षा सुधारों पर अपनी सिफारिशें देगी।
सुप्रीम कोर्ट (फाइळ फोटो)
हलफनामे के मुताबिक, संसद ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन अधिनियम, 2026 पारित किया है। यह कानून प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान करता है। इसके तहत दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष की जेल और पांच करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स
केंद्र ने 27 जुलाई, 2026 को परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके अध्यक्ष इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणी हैं। समिति में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, शिक्षा मंत्रालय की पूर्व सचिव अनीता करवाल और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव आम्रित लाल मीणा शामिल हैं।
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टास्क फोर्स को परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, तकनीकी ढांचे, प्रशासनिक सुधार, छात्र हितों और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलावों का रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और अन्य उभरती तकनीकों के इस्तेमाल पर भी सुझाव देने हैं।
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह अलग-थलग
हलफनामे के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को पूरी तरह सुरक्षित और अलग-थलग स्थान पर रखा जाता है। वहां मोबाइल फोन या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होती। पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और केंद्रीय सशस्त्र बलों की सुरक्षा में की जाती है।विशेषज्ञ वास्तविक आवश्यकता से कम-से-कम पांच गुना अधिक प्रश्नों का बैंक तैयार करते हैं। इसके बाद कई अलग-अलग सेट बनाए जाते हैं, जिनमें न तो प्रश्नों का और न ही विशेषज्ञों का कोई ओवरलैप होता है। परीक्षा वाले दिन अंतिम समय में यह तय किया जाता है कि किस सेट का इस्तेमाल किया जाएगा।
13 भाषाओं में अनुवाद, एआई की भी मदद
NEET-UG परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित होती है। हलफनामे में कहा गया है कि अनुवाद के दौरान पेपर लीक की आशंका कम करने के लिए एआई-सहायता प्राप्त, इंटरनेट से पूरी तरह अलग (एयर-गैप्ड) व्यवस्था बनाई गई है। एआई प्रारंभिक अनुवाद तैयार करता है, जिसकी बाद में मानव विशेषज्ञ जांच करते हैं।अनुवादकों को प्रश्नों का बड़ा हिस्सा दिया जाता है, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि अंतिम प्रश्नपत्र में कौन से प्रश्न शामिल होंगे।
हर अभ्यर्थी के लिए अलग प्रश्नपत्र और ओएमआर
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अदालत को बताया कि प्रत्येक प्रश्नपत्र पर एक विशिष्ट सीरियल नंबर होता है, जो संबंधित अभ्यर्थी से जुड़ा होता है। ओएमआर शीट का नंबर भी उसी प्रश्नपत्र से मेल खाता है। नकल रोकने के लिए प्रश्नों का क्रम और प्रत्येक प्रश्न के चारों विकल्पों का क्रम भी अलग-अलग रखा जाता है। इसका मतलब है कि एक ही कक्षा में बैठे दो छात्रों के प्रश्नपत्रों में प्रश्नों और विकल्पों का क्रम अलग होगा।
छह परतों वाली पैकिंग और QR ट्रैकिंग
हलफनामे के मुताबिक, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए छह स्तर की छेड़छाड़-रोधी पैकिंग व्यवस्था अपनाई गई है। पहले प्रत्येक अभ्यर्थी का प्रश्नपत्र और ओएमआर एक पैकेट में रखा जाता है। इसके बाद कक्षा स्तर के पैकेट, कार्डबोर्ड बॉक्स, स्टील ट्रंक और बाहरी सुरक्षा कवर जैसी कई परतों से उसे सुरक्षित किया जाता है।बॉक्स पर एक विशेष क्यूआर कोड लगाया जाता है, जिसे परीक्षा केंद्र, कस्टोडियन बैंक और परिवहन व्यवस्था से जोड़ा जाता है। बॉक्स जब भी एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास जाता है, दोनों अधिकारियों के आधार प्रमाणीकरण के साथ क्यूआर कोड स्कैन किया जाता है। इससे एनटीए को हर समय यह जानकारी रहती है कि प्रश्नपत्र किस स्थान पर है।
GPS निगरानी और केंद्रीय बलों की सुरक्षा
प्रश्नपत्र ले जाने वाले सभी वाहनों में जीपीएस उपकरण लगाए जाते हैं। हर वाहन चालक का मोबाइल नंबर और पहचान पत्र दर्ज किया जाता है। सड़क मार्ग से होने वाली पूरी आवाजाही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की निगरानी में होती है।
केंद्र ने बताया कि 21 जून को आयोजित पुनर्परीक्षा के दौरान 51,311 जैमर, 1.38 लाख सीसीटीवी कैमरे और करीब 87,000 कर्मियों को तैनात किया गया था। अभ्यर्थियों की फ्रिस्किंग और बायोमेट्रिक सत्यापन की भी व्यवस्था की गई थी।
क्या NEET-UG कंप्यूटर आधारित होगी?
हलफनामे में कहा गया है कि फिलहाल एनटीए की प्रमुख परीक्षाओं में NEET-UG ही एकमात्र ऐसी परीक्षा है, जो अब भी पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित होती है। परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नंदन नीलेकणी समिति की रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा।
