NEET पेपर लीक रोकने का फुलप्रूफ प्लान! केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

संसद ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन अधिनियम, 2026 पारित किया है। यह कानून प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान करता है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन हलफनामा दाखिल कर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया है। केंद्र ने अदालत को बताया कि परीक्षा में धांधली रोकने के लिए एक तरफ कानून को और सख्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की गई है, जो तीन महीने के भीतर परीक्षा सुधारों पर अपनी सिफारिशें देगी।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (फाइळ फोटो)

हलफनामे के मुताबिक, संसद ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन अधिनियम, 2026 पारित किया है। यह कानून प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान करता है। इसके तहत दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष की जेल और पांच करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

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