88 साल के बेटे ने जीता दशकों पुराना 37 हजार रुपये एरियर का केस, इंसाफ के लिए भटकते पिता की हुई थी मौत

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Nov 15, 2023, 04:37 PM IST

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ग्राम अधिकारी असंवेदनशील नौकरशाही की लालफीताशाही का शिकार बन गया और मुआवजा प्राप्त किए बिना मर गया।

Decades Long Legal Battle: कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में नौकरशाही को असंवेदनशील करार देते हुए एक अधिकारी को 1979 से 1990 तक का एरियर जारी करने का निर्देश दिया है। ग्राम अधिकारी का 88 वर्षीय बेटा 37,000 रुपये की बकाया राशि के लिए दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ता रहा जिसके बाद अदालत का यह फैसला आया। अदालत ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ग्राम अधिकारी असंवेदनशील नौकरशाही की लालफीताशाही का शिकार बन गया और मुआवजा प्राप्त किए बिना मर गया। उसका बेटा, जो अब 88 वर्ष का है, अभी भी अपने पिता के अधिकार के लिए लड़ रहा है। न्यायमूर्ति पीएस दिनेश कुमार और न्यायमूर्ति टीजी शिवशंकर गौड़ा की खंडपीठ ने कहा कि यह हैरत की बात है कि राज्य ने माना कि याचिकाकर्ता का पिता मुआवजे के हकदार नहीं था।

Court

कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला

1979 का मामला

बेंगलुरु के राजाजिंगर निवासी दिवंगत टीके शेषाद्रि अयंगर के बेटे टीएस राजन ने 2021 में एक रिट याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके पिता चिक्कमगलुरु जिले के कदुर तालुक के थंगाली गांव में 'पटेल' के रूप में कार्यरत थे। हाई कोर्ट द्वारा पारित एक आदेश के अनुसार कर्नाटक राज्य पटेल संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद राजन के पिता भी लाभार्थियों में से एक थे। आदेश में अगस्त 1979 से जून 1990 तक प्रति माह 100 रुपये अनुकंपा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

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