INS विक्रांत का शिकार करने आए PNS गाजी की बंगाल की खाड़ी में बना दी गई कब्र, 4 दिसंबर 1971 का ये इतिहास जरूर जानें

बात 4 दिसंबर 1971 की है। जब भारत की शान INS विक्रांत को डुबाने के लिए आई पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS गाजी की कब्र बंगाल की खाड़ी में समुद्र के नीचे बना दी गई। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को PNS गाजी के रूप में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था। जानें PNS गाजी के बारे में सब-कुछ।

PNS Ghazi पाकिस्तान की एक पनडुब्बी यानी सब-मरीन थी, जिसकी 'कब्र' आज भी बंगाल की खाड़ी में समुद्र की गहराईयों में मौजूद है। पाकिस्तान को यह पनडुब्बी अमेरिका से मिली थी। अमेरिका में इस पनडुब्बी का नाम डियाब्लो था। 31 मार्च 1945 को यह सब-मरीन अमेरिकी नेवी में कमीशन हुई थी। साल 1963 में अमेरिका ने इस पनडुब्बी को शैतानी दिमाग वाले पाकिस्तान को लीज पर दे दिया। पाकिस्तान ने इस पनडुब्बी को अपनी नेवी में शामिल करते हुए इसका नाम पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) रख दिया। बता दें कि ट्रेंच क्लास की इस सब मरीन के पहले नाम यानी डियाब्लो का मतलब भी स्पैनिश में शैतान ही होता है। लेकिन PNS गाजी इतनी बड़ी सब-मरीन थी, उसकी क्षमताएं इतनी ज्यादा थी कि वह न तो 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में और न ही 1971 के युद्ध में INS विक्रांत का पता लगा पायी। जबकि दोनों ही युद्धों में उसे भारत की शान INS विक्रांत का पता लगाकर उसे तबाह करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

INS Vikrant - PNS Ghazi.

शिकारी बनकर आयी पाकिस्तानी सब-मरीन, खुद ही शिकार बन गई

95 मीटर लंबी PNS गाजी का वजन समुद्र की सतह पर 1570 टन और पानी में 2453 टन था। इसके इंसिग्निया में एक शैतान को समुद्र में टॉरपीडो लेकर दौड़ते हुए दिखाया गया था। 1 दिसंबर 1944 को लान्च हुई इस सब मरीन को मार्च 1945 में डियाब्लो के नाम से पोर्ट्समाउथ नेवी यार्ड में कमीशन किया गया था। इसके बाद यह पर्ल हार्बर होते हुए अपनी पहली गश्त पर निकली थी। दूसरे विश्व युद्ध के अंतिम दिनों तक यह कई मिशनों पर तैनात रही और 1946 में अमेरिका के पूर्वी तट पर सक्रिय रही। अमेरिका के लिए कई साल तक सेवाएं देने के बाद डियाब्लो को 1 जून 1964 को डि-कमीशन करके पाकिस्तान को लीज पर दे दिया गया।

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