भारत की रेलवे तकनीक एक बार फिर दुनिया में अपनी पहचान बना रही है। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) द्वारा निर्मित 3300 हॉर्स पावर का स्वदेशी डीज़ल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मोज़ाम्बिक के लिए रवाना हो गया है। यह बरेका द्वारा मोज़ाम्बिक को भेजा गया दसवां लोकोमोटिव है, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। यह लोकोमोटिव 21 फरवरी 2026 को रवाना किया गया। बरेका को मोज़ाम्बिक के लिए कुल 10 लोकोमोटिवों के निर्माण और निर्यात का ऑर्डर मिला था, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया। यह पूरा निर्यात कार्य RITES के माध्यम से किया गया है।
वाराणसी से मोज़ाम्बिक रवाना हुआ बरेका का 10वां स्वदेशी लोकोमोटिव
इन 3300 हॉर्स पावर वाले लोकोमोटिवों की खास बात यह है कि इन्हें केप गेज (1067 मिमी) के अनुसार डिजाइन किया गया है और ये 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम हैं। साथ ही, इनमें आधुनिक और चालक-अनुकूल सुविधाएं दी गई हैं, जैसे-
- रेफ्रिजरेटर
- हॉट प्लेट
- मोबाइल होल्डर
- आरामदायक और आधुनिक केबिन डिजाइन
ये सभी सुविधाएं लोको पायलट की सुविधा और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाती हैं। वाराणसी स्थित बरेका अब सिर्फ भारत की जरूरतें ही पूरी नहीं कर रहा, बल्कि वह वैश्विक रेलवे बाजार में भी अपनी मजबूत जगह बना चुका है। वर्ष 2014 से अब तक बरेका श्रीलंका, म्यांमार और मोज़ाम्बिक जैसे देशों को लोकोमोटिव निर्यात कर चुका है, जिससे उन देशों की रेलवे व्यवस्था को मजबूती मिली है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ विज़न पर भारतीय रेल
यह उपलब्धि भारतीय रेल के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ विज़न को साकार करती है। भारतीय रेल आज दुनिया की अलग-अलग गेज प्रणालियों के अनुसार रोलिंग स्टॉक डिजाइन करने और बनाने में सक्षम है। बरेका की यह सफलता भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता और वैश्विक विश्वास को दर्शाती है। आने वाले समय में भारत रेलवे उपकरणों के एक बड़े निर्यातक के रूप में और मजबूत होकर उभरेगा।
इन लोकोमोटिवों की आपूर्ति एम/एस राइट्स (RITES) के माध्यम से 10 लोकोमोटिवों के निर्माण एवं निर्यात के अनुबंध के अंतर्गत की गई है। पहले दो लोकोमोटिव जून 2025 में, तीसरा सितंबर में, चौथा अक्टूबर में तथा पांचवां लोकोमोटिव 12 दिसंबर को भेजा गया था। इसके पश्चात छठा लोकोमोटिव 15 दिसंबर 2025, सातवां 8 जनवरी 2026, आठवां 23 जनवरी 2026, नौवां लोकोमोटिव 17 फरवरी 2026 को रवाना किया गया था। यह निर्यात वैश्विक मंच पर लोकोमोटिव निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।
