सुपरटेक के चेयरमैन आर.के.अरोड़ा ने जमानत के लिए कोर्ट में मेडिकल के आधार पर गुहार लगाई है। सुपरटेक के चेयरमैन और प्रमोटर आरके अरोड़ा ने बुधवार को स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा कि हिरासत में उनका वजन 10 किलो कम हो गया है। उन्होंने हाल ही में स्वास्थ्य आधार पर 90 दिनों की अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली की अदालत का रुख किया है।
सुपरटेक समूह के अध्यक्ष और प्रवर्तक आर. के. अरोड़ा
'हो गई है शारीरिक कमजोरी'
आरके अरोड़ा की ओर से पेश वकील तनवीर अहमद मीर ने आवेदक को चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश देने की मांग करते हुए कहा कि वह स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से पीड़ित है जिसके लिए अंतरिम जमानत की आवश्यकता है। मीर ने कहा- "मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि आज की तारीख में आवेदक न केवल बीमार है बल्कि बीमारी के कारण शारीरिक कमजोरी भी हो गई है।"
राम मनोहर लोहिया में इलाज
अरोड़ा के वकील ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने खर्च पर अपनी पसंद के किसी भी निजी अस्पताल से इलाज कराने के अधिकार को मान्यता देता है। एक बार जब किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, तो स्वतंत्रता को छोड़कर उसके सभी अधिकार बरकरार रहते हैं। अरोड़ा ने अपनी अंतरिम जमानत याचिका में कहा कि जेल अधिकारियों ने उन्हें सरकारी अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेफर किया था, जहां आवेदक की जांच की गई और विभिन्न उपचार निर्धारित किए गए।
सुधार नहीं
हालांकि, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों द्वारा यह देखा गया है कि आरोपी में सुधार के लक्षण नहीं दिख रहे हैं। मीर ने आग्रह किया, "आवेदक को तुरंत अंतरिम जमानत पर रिहा करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसकी बीमारियों का सटीक निदान किया जा सके और उसे तत्काल प्रभावी और पर्याप्त चिकित्सा उपचार प्रदान किया जा सके।"
क्या है आरोप
अरोड़ा को 27 जून 2023 को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 12 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी। सुपरटेक समूह, उसके निदेशकों और प्रवर्तकों के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)कथित धनशोधन के आरोपों की जांच कर रहा है। ईडी, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा सुपरटेक लिमिटेड और इस समूह की कंपनियों के खिलाफ कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी,फर्जीवाड़ा और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में दर्ज 26 प्राथमिकी के आधार पर जांच कर रही है। कंपनी पर कम से कम 670 मकान खरीददारों से 164 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
