ME/CFS Awareness Day 2026: आजकल थकान, कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं, लेकिन कई बार यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं होती। कुछ लोग लंबे समय तक ऐसी थकान से जूझते रहते हैं जो आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होती। इसी गंभीर स्थिति को मायल्जिक एन्सेफेलोमाइलाइटिस (ME), क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम (CFS) और फाइब्रोमायल्जिया कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डालती है। हर साल 12 मई को ME CFS जागरूकता दिवस मनाया जाता है ताकि लोग इस बीमारी को समझ सकें और इससे जूझ रहे मरीजों के प्रति संवेदनशील बनें। यह दिन लोगों को यह बताने का भी काम करता है कि लगातार रहने वाली थकान को नजरअंदाज करना कई बार भारी पड़ सकता है।
12 मई को क्यों मनाया जाता है ME/CFS जागरूकता दिवस
क्या है एमई/सीएफएस बीमारी - ME CFS Day
एमई/सीएफएस एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी मानी जाती है। इसमें व्यक्ति को बेहद ज्यादा थकान महसूस होती है, जो आराम करने के बाद भी कम नहीं होती। इस बीमारी का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं बल्कि दिमाग, नींद और रोजमर्रा के कामों पर भी पड़ता है। कई मरीजों को थोड़ा सा काम करने के बाद भी कमजोरी और दर्द महसूस होने लगता है। यही वजह है कि इसे सिर्फ “थकान” समझना गलत माना जाता है।
इस बीमारी के लक्षण क्यों होते हैं अलग
एमई/सीएफएस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को लगातार सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और नींद की समस्या रहती है, तो कुछ लोगों को ध्यान लगाने और चीजें याद रखने में परेशानी होती है। कई मरीजों को थोड़ी मेहनत के बाद हालत ज्यादा खराब महसूस होने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यही वजह है कि इस बीमारी की पहचान करना कई बार आसान नहीं होता।
12 मई को ही क्यों मनाया जाता है जागरूकता दिवस?
हर साल 12 मई को ME/CFS जागरूकता दिवस मनाया जाता है। यह तारीख मशहूर नर्स और सामाजिक सुधारक फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) की जयंती से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि उन्होंने भी अपने जीवन के लंबे समय में ऐसी ही थकान और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया था। इस दिन का मकसद लोगों के बीच बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना और मरीजों को बेहतर समर्थन दिलाना है।
मरीजों की जिंदगी पर कैसे पड़ता है असर
एमई/सीएफएस से जूझ रहे लोगों की जिंदगी काफी प्रभावित हो सकती है। कई बार मरीज नौकरी, पढ़ाई या सामान्य सामाजिक जीवन भी ठीक से नहीं जी पाते। लगातार कमजोरी और मानसिक थकावट के कारण उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित होने लगता है। यही कारण है कि डॉक्टर समय रहते सही जांच और देखभाल की सलाह देते हैं। परिवार और दोस्तों का भावनात्मक सहयोग भी ऐसे मरीजों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
क्यों जरूरी है इस बीमारी को लेकर जागरूकता
आज भी बहुत से लोग एमई/सीएफएस को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जागरूकता दिवस का उद्देश्य यही है कि लोग इस बीमारी को गंभीरता से लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही जानकारी और समय पर इलाज से मरीजों की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही समाज में इस बीमारी को लेकर समझ बढ़ाना भी बेहद जरूरी है ताकि मरीज खुद को अकेला महसूस न करें।
