Heart Disease In India: हमारे घरों में रोजमर्रा की जिंदगी कैसी है, इसके बारे में शायद ही कम कभी सोचते हैं। पापा सुबह उठते ही ब्लड प्रेशर की दवा खोज रहे होते हैं, मम्मी डॉक्टर की रिपोर्ट देखकर घबराई रहती हैं, और ऑफिस में अचानक सुनाई देता है कि कोई साथी सिर्फ 35-40 की उम्र में ही हार्ट अटैक से चला गया। यह सुनकर मन कांप जाता है। दिल, जो जीवन की मजबूत डोर है, वही अब सबसे कमजोर कड़ी बनता जा रहा है। भारत आज उस दौर में खड़ा है जहां दिल की बीमारियां किसी एक उम्र, जगह या तबके तक सीमित नहीं रह गईं। बुजुर्ग ही नहीं, युवा भी इससे जूझ रहे हैं। दिल अब बच्चा न रहकर - कम उम्र में ही बुजुर्ग होता जा रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि जो दिल हमारे शरीर का सबसे मजबूत इंजन माना जाता है, आखिर क्यों भारतीयों में इतना कमजोर हो रहा है? भारतीयों के दिल पर इतना बोझ क्यों है? इस विषय बेहतर के लिए हमने दिल्की के टॉप हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर से बात की। भारत में लगातार हृदय रोग के मामले क्यों बढ़ रहे हैं और बचने के लिए हम ऐसा क्या कर सकते हैं कि शरीर का यह इंजन लंबे समय तक चले? आइए, इस पर विस्तार से बात करते हैं।
भारत में दिल की बीमारी की स्थिति
मैक्स अस्पताल, पड़पड़गंज के हृदय रोग विशेषज्ञ और कार्डियक साइंसेज विभाग के डॉ. वैभव मिश्रा बताते हैं कि भारत में दिल की बीमारी एक हेल्थ क्राइसिस बन चुकी है। अब इसे 'हार्ट डिजीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड' कहा जाने लगा है। भारत में दिल की बीमारियों को लेकर स्थिति बहुत चिंताजनक है। रजिस्ट्रार जनरल की सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) 2021-23 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 31% मौतें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं। यानी यह हर तीसरी मौत का कारण दिल है।
- हर 4 में से 1 भारतीय को दिल की बीमारी का खतरा है।
- दुनिया में सबसे ज्यादा हार्ट से जुड़ी मौतें भारत में होती हैं।
- शहरों में दौड़भाग और गांवों में समय पर इलाज न मिलने, दोनों ही स्थितियां खतरे को बढ़ा रही हैं।
भारत में दिल की बीमारी
भारत में दिल की बीमारियों को डराने वाले आंकड़े
भारतीयों में दिल की बीमारियों के आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं। कभी-कभी आंकड़े भी हमें आईना दिखा देते हैं। भारत में दिल की बीमारी की स्थिति को लेकर जो डेटा सामने आता है, वह बेहद चिंताजनक है।
- भारत में हर साल लगभग 28-30% मौतें दिल की बीमारी से होती हैं।
- 25 से 40 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले पिछले दशक में दोगुने से ज्यादा बढ़े हैं।
- यूथ रजिस्ट्री (Western India) अध्ययन के अनुसार, 40 साल से कम उम्र के हार्ट अटैक मरीजों में तंबाकू सेवन 49.7% सबसे बड़ा कारण निकला।
- एक मल्टी-सेंटर अध्ययन (2022) में पाया गया कि 45 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का प्रसार काफी ज्यादा है।
- ट्रेंड्स कोरोनरी हार्ट डिजीज एपिडेमियोलॉजी इन इंडिया रिसर्च के अनुसार, शहरी इलाकों में CHD की प्रचलन दर पिछले दशकों में 1% से बढ़कर 9-10% और ग्रामीणों में 1% से भी कम से बढ़कर 4-6% हो गई है।
डराने वाने आंकड़े
भारतीयों के दिल पर इतना बोझ क्यों है?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, हमारी कौन-सी आदतें हैं जो हमारे दिल को नुकसान पहुंचा रही हैं? डॉ. मिश्रा की मानें तो असल में, भारतीयों के दिल पर बोझ हमारी ही रोजमर्रा की लाइफस्टाइल से बढ़ रहा है। दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ाने में उनकी कई दैनिक आदतें शामिल हैं। उनका कहना है कि हमारे देश में दिल की बीमारी का बड़ा कारण यह है कि लोग छोटी-छोटी चेतावनी को नजरअंदाज करते हैं और डॉक्टर के पास देर से पहुंचते हैं।
- तेल-घी और फास्ट फूड की आदत: यानी घर का सादा खाना छोड़कर बाहर का प्रोसेस्ड और तला-भुना खाना ज्यादा खाना।
- तनाव और टेंशन: नौकरी का प्रेशर, बिजनेस का तनाव, परिवार और पैसे की चिंता आदि।
- बैठकर काम करना: घंटों लैपटॉप और मोबाइल पर झुके रहना।
- धूम्रपान और शराब: जो सीधा-सीधा दिल की सेहत बिगाड़ते हैं।
- समय पर जांच न कराना: लोग तब तक टेस्ट नहीं कराते जब तक बीमारी गंभीर न हो जाए।
दिल की बीमारियों के प्रमुख लक्षण - Symptoms Of Heart Disease In Hindi
बता दें अक्सर दिल का मरीज बनने से पहले ही शरीर हमें चेतावनी देता है। लेकिन लोग इन्हें मामूली समझकर टाल देते हैं। यही उनके दिल के ऊपर भारी पढ़ता है। दिल की बीमारियों कुछ मुख्य संकेत हैं जिन पर आपको जरूर ध्यान देना चाहिए,
- छाती में दर्द या भारीपन
- सांस फूलना
- तेज या अनियमित धड़कन
- लगातार थकान रहना
- ठंडा पसीना आना
- हाथ, कंधे या पीठ तक दर्द फैलना
डॉक्टर्स का कहना है कि कभी-कभी बिना किसी लक्षण के भी हार्ट अटैक हो सकता है। यही वजह है कि समय-समय पर चेकअप कराना बेहद जरूरी है।
दिल की बीमारी के लक्षण
क्यों युवा भारतीय भी चपेट में आ रहे हैं?
एक समय था जब हार्ट अटैक का नाम आते ही लोग बुजुर्गों के बारे में सोचते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। आजकल 30-35 की उम्र में ही लोगों में हार्ट अटैक होना आम बात हो गई है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं,
- देर रात तक जागना और नींद पूरी न करना।
- काम और करियर का दबाव।
- जंक फूड और बाहर का खाना।
- जिम या वॉक के लिए समय न निकालना।
- सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम का स्ट्रेस।
युवाओं के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अब कोई ऑप्शन नहीं रहा, बल्कि लाइफ सेविंग चॉइस बन चुका है, जो उन्हें दिल की बीमारियों के खतरे में डाल रहा है।
डॉक्टर्स की क्या राय है?
डॉ. वैभव मिश्रा की मानें तो दिल की बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाकर, समय पर जांच करवाकर, और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है। वह सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति को 30 की उम्र के बाद सालाना हार्ट चेकअप जरूर कराना चाहिए। इसके साथ ही सादा खाना, व्यायाम और तनाव कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
हार्ट हैल्दी रखने के उपाय
दिल को स्वस्थ रखने के आसान उपाय जो हर परिवार अपना सकता है
अब बात करते हैं उन आसान उपायों की, जिन्हें अगर हम अपनी जिंदगी में शामिल कर लें, तो दिल हमेशा मजबूत रहेगा।
- रोज कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या व्यायाम करें।
- ताजा फल और सब्जियां ज्यादा खाएं, तैलीय और मसालेदार खाना कम करें।
- धूम्रपान और शराब छोड़ें - क्योंकि यह सीधे दिल पर चोट करते हैं।
- तनाव को कम करें - परिवार के साथ वक्त बिताएं, ध्यान (मेडिटेशन) करें।
- साल में एक बार हार्ट चेकअप जरूर कराएं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिल हमारी जिंदगी का इंजन है। जब तक यह धड़कता है, तब तक हमारी खुशियां, रिश्ते और सपने भी सांस लेते हैं। भारत में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और यह हर परिवार तक पहुंच चुकी हैं। अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर अपने दिल की जिम्मेदारी लें।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
