हेल्थ

डेंगू, चिकनगुनिया और जीका के बढ़ते खतरे पर WHO सख्त, बीमारियों की जल्दी पहचान के लिए टेस्टिंग बढ़ाने पर फोकस

WHO New Guidelines For Dengue Chikungunya Zika Virus: डेंगू, चिकनगुनिया और जीका के बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) ने सख्ती का रुख अपनाया है। संगठन ने अब इसको लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब इस तरह की वायरल बीमारियों की जल्दी पहचान और टेस्टिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से....

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WHO New Guidelines For Dengue Chikungunya Zika Virus

WHO New Guidelines For Dengue Chikungunya Zika Virus: अब डेंगू, चिकनगुनिया और जीका को हल्के में लेना ठीक नहीं। WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इन बीमारियों को लेकर सख्ती दिखा दी है। मच्छर से फैलने वाली इन बीमारियों के मामले हर साल बढ़ते जा रहे हैं, और समय रहते पहचान न होने से कई बार हालात बिगड़ जाते हैं। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नई क्लिनिकल गाइडलाइन जारी की है, जिसमें खासतौर पर जल्दी पहचान और ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग पर जोर दिया गया है, ताकि सही वक्त पर इलाज शुरू हो सके।

WHO ने पहली बार जारी की संयुक्त गाइडलाइन

डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ये तीनों बीमारियां मच्छर से फैलती हैं और इनकी पहचान शुरू में करना मुश्किल होता है। WHO ने पहली बार इन तीनों को लेकर एक साथ क्लिनिकल गाइडलाइन जारी की है, ताकि डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी लक्षण पहचानकर सही इलाज शुरू कर सकें।

क्यों जरूरी है टेस्टिंग पर ध्यान देना?

अक्सर इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, बदन दर्द, थकावट सभी आम वायरल जैसे लगते हैं। ऐसे में मरीज खुद भी लापरवाही करते हैं और इलाज में देरी हो जाती है। WHO की मानें तो टेस्टिंग जितनी जल्दी होगी, बीमारी को काबू करना उतना ही आसान होगा।

हल्के और गंभीर लक्षणों की पहचान आसान हो

गाइडलाइन में साफ बताया गया है कि मरीजों के लक्षणों को दो कैटेगरी में बांटा जाए हल्के और गंभीर। हल्के मामलों में पानी की कमी और दर्द का इलाज जरूरी होता है, जबकि गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती, फ्लूइड मैनेजमेंट और खून चढ़ाना पड़ सकता है।

इलाज में इन बातों से बचें

WHO ने यह भी कहा है कि इन बीमारियों में नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAID) जैसी दवाएं (जैसे ibuprofen) और स्टेरॉयड नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे हालात बिगड़ सकते हैं। इलाज में सादे पैरासिटामोल और हाइड्रेशन को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बीमारी बढ़े नहीं

यह गाइडलाइन सिर्फ डॉक्टर्स के लिए नहीं है, बल्कि सरकार और अस्पतालों को भी दिशा देती है कि कैसे इन बीमारियों से निपटने के लिए सिस्टम तैयार किया जाए। टेस्टिंग फैसिलिटी बढ़ाना, समय पर इलाज देना और लोगों को जागरूक करना अब सबसे ज़रूरी कदम हैं।

निष्कर्ष

डेंगू, चिकनगुनिया और जीका अब सीजनल बीमारी नहीं रह गई हैं। WHO की नई गाइडलाइन का मकसद है समय पर जांच और सही इलाज ताकि बीमारी जानलेवा न बनने पाए। अब वक्त है कि लोग भी लक्षणों को हल्के में न लें और टेस्टिंग में देरी न करें।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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