Risky Medicines during Heatwave: देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। सड़कें तप रही हैं, हवा गर्म भट्ठी जैसी महसूस हो रही है और अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर, कमजोरी और हीट स्ट्रोक के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन इस भीषण गर्मी के बीच एक खतरा ऐसा भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सामान्य दवाएं हीटवेव के दौरान शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
हीटवेव में दवाएं बन सकती हैं खतरा, डॉक्टर से जानें जरूरी बातें
बहुत से लोग रोजाना ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दर्द, एलर्जी या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं लेते हैं। आमतौर पर ये दवाएं सुरक्षित होती हैं, लेकिन जब शरीर तेज गर्मी और पानी की कमी से जूझ रहा हो, तब यही दवाएं शरीर के कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। नतीजा - डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, किडनी पर दबाव और कई बार मेडिकल इमरजेंसी तक।
गर्मी में शरीर कैसे खुद को बचाता है
हमारा शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है। जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर ज्यादा पसीना बनाकर गर्मी बाहर निकालने की कोशिश करता है। लेकिन अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए या कोई दवा इस प्रक्रिया में बाधा डाल रही हो, तो बॉडी ओवरहीट होने लगती है और यहीं से दवाइयों को लेने की असली परेशानी शुरू होती है।
धीरे-धीरे शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स कम होने लगते हैं। ब्लड प्रेशर गिर सकता है, चक्कर आ सकते हैं, कमजोरी महसूस हो सकती है और गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक तक हो सकता है।
हीटवेव में ब्लड प्रेशर की दवाएं क्यों बढ़ा देती हैं खतरा
इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मियों में सबसे ज्यादा सावधानी उन लोगों को रखनी चाहिए जो हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं या डाइयूरेटिक्स यानी 'वॉटर पिल्स' लेते हैं।
ये दवाएं शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर निकालती हैं ताकि ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहे। लेकिन भीषण गर्मी में शरीर पहले ही पसीने के जरिए काफी पानी खो रहा होता है। ऐसे में दवा और गर्मी दोनों मिलकर डिहाइड्रेशन को तेज कर देते हैं।
इसके कारण हो सकते हैं:
- अचानक कमजोरी महसूस होना
- चक्कर आना
- ब्लड प्रेशर बहुत नीचे गिर जाना
- बेहोशी
- किडनी पर दबाव बढ़ना
फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहित शर्मा कहते हैं कि कई लोग समझ ही नहीं पाते कि उनकी कमजोरी या चक्कर का कारण गर्मी के साथ दवाओं का असर भी हो सकता है। खासकर बुजुर्ग मरीजों में यह खतरा ज्यादा देखा जाता है।
दर्द की दवाएं भी किडनी पर डाल सकती हैं असर
बहुत से लोग सिरदर्द, बदन दर्द या जोड़ों के दर्द में बिना ज्यादा सोचे पेनकिलर ले लेते हैं। लेकिन हीटवेव के दौरान यही आदत खतरनाक हो सकती है।
इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक और कुछ एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं डिहाइड्रेशन की स्थिति में किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। अगर शरीर में पहले से पानी की कमी हो और ऊपर से ये दवाएं ली जाएं, तो किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
इंटरनल मेडिसिन डॉ. धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि गर्मियों में कई मरीजों में Acute Kidney Stress के मामले सामने आते हैं, जहां कारण सिर्फ तेज गर्मी नहीं बल्कि गर्मी और दवाओं का कॉम्बिनेशन होता है।
मानसिक स्वास्थ्य की कुछ दवाएं भी रोक सकती हैं शरीर की कूलिंग
डॉ. धर्मेंद्र कुमार का कहाना है कि यह बात कम लोग जानते हैं कि कुछ एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसाइकोटिक और एलर्जी की दवाएं शरीर की पसीना बनाने की क्षमता को कम कर सकती हैं। यानी शरीर गर्मी बाहर निकाल ही नहीं पाता।
कुछ दवाएं दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती हैं जो शरीर का तापमान नियंत्रित करता है। ऐसे में व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और शरीर अंदर ही अंदर जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगता है।
इस स्थिति में ये लक्षण दिख सकते हैं:
- अत्यधिक थकान
- बेचैनी
- शरीर गर्म लगना लेकिन पसीना कम आना
- भ्रम या कन्फ्यूजन
- मांसपेशियों में ऐंठन
डायबिटीज मरीजों को हीटवेव में क्यों रहना चाहिए ज्यादा सावधान
डायबिटीज के मरीजों में डिहाइड्रेशन का असर ज्यादा तेजी से दिखाई दे सकता है। शरीर में पानी की कमी ब्लड शुगर को अचानक ऊपर-नीचे कर सकती है।
कुछ लोगों में गर्मी के दौरान:
- चक्कर
- धुंधला दिखना
- कमजोरी
- कन्फ्यूजन
- इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस
जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
डॉ. मोहित शर्मा का कहना है कि अगर डायबिटीज के साथ ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी भी हो, तो रिस्क और बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर से संपर्क में रहें। ज्यादा गर्मी में घबराहट या शरीर में असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर ना करें।
हीटवेव में बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में क्यों
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्यास महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है। कई बुजुर्ग पर्याप्त पानी नहीं पीते। ऊपर से अगर वे रोजाना कई दवाएं ले रहे हों, तो गर्मी का असर ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
कई बार बुजुर्गों में हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेत भी सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
डॉ. मोहित शर्मा अलर्ट करते हैं कि परिवार को इन संकेतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:
- बार-बार चक्कर आना
- पेशाब कम होना
- बहुत ज्यादा नींद या सुस्ती
- मुंह सूखना
- भ्रम की स्थिति
- चलने में अस्थिरता
हीटवेव में कौन से संकेत बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करने चाहिए
अगर गर्म मौसम में दवाएं लेने वाला व्यक्ति ये लक्षण महसूस करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है:
- लगातार कमजोरी
- सूखा मुंह
- बहुत कम पेशाब
- तेज चक्कर
- मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन
- उलझन या कन्फ्यूजन
- अत्यधिक थकान
- बेहोशी जैसा महसूस होना
डॉक्टर साफ कहते हैं कि अपनी दवाएं खुद बंद करना सही नहीं है। कई लोग डरकर अचानक दवा छोड़ देते हैं, जो और भी खतरनाक हो सकता है।
हीटवेव में खुद को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
गर्मी के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं।
हीटवेव में क्या करें
- दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें
- ORS या इलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल करें
- 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें
- हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनें
- बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
- बाहर जाते समय सिर ढकें
- घर लौटते ही तुरंत बहुत ठंडा पानी न पिएं
- कमजोरी महसूस हो तो आराम करें
हीटवेव में क्या न करें
- खाली पेट धूप में न निकलें
- डिहाइड्रेशन के बावजूद दर्द की दवा लेने से बचें
- जरूरत से ज्यादा कैफीन या शराब न लें
- दवाएं खुद से बंद या डोज कम-ज्यादा न करें
- मौसम बदलता है, दवाओं का असर भी बदल सकता है
डॉ. मोहित शर्मा बताते हैं कि लोग अक्सर मान लेते हैं कि दवाएं हर मौसम में एक जैसा असर करती हैं। जबकि सच्चाई यह है कि शरीर का रिस्पॉन्स मौसम के साथ बदल सकता है।
भीषण गर्मी में शरीर पहले ही तनाव में होता है। ऐसे में डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कई पुरानी बीमारियों को अचानक गंभीर बना सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर हीटवेव को सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि मेडिकल रिस्क की तरह देखने की सलाह देते हैं।
इस गर्मी अगर आप या आपके घर में कोई नियमित दवाएं ले रहा है, तो सिर्फ तापमान नहीं, शरीर के संकेतों पर भी नजर रखिए। कई बार खतरा धूप से नहीं, शरीर के अंदर चुपचाप बढ़ रहा होता है।
