Ectopia cordis: हार्ट डिजीज के बारे में अक्सर आपने कई आर्टिकल्स में पढ़ा होगा या फिर अपने आसपास हार्ट के मरीजों को देखा होगा, लेकिन क्या आप ऐसी स्थिति के बारे में जानते हैं जो बच्चों को जन्म से ही प्रभावित करती है। एक्टोपिया कोर्डिस एक ऐसी ही स्थिति है, जो काफी रेयर है लेकिन यह बच्चों को जन्म से ही होने वाली हार्ट डिजीज है। कुछ रिपोर्ट्स की माने तो 126,000 बच्चों में से एक बच्चा इस बीमारी का शिकार होता है। आज हम इस लेख में एक्टोपिया कोर्डिस के बारे में विस्तार से जानेंगे। आइए जानते हैं क्या है एक्टोपिया कोर्डिस?
एक्टोपिया कोर्डिस क्या है?
क्या है एक्टोपिया कोर्डिस?
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्टोपिया कोर्डिस एक रेयर हार्ट डिजीज है और यह एक जन्मजात दोष भी है। इस स्थिति में बच्चे का हार्ट चेस्ट कैविटी में न होकर, इसके बाहर या फिर हटकर होता है। इस डिजीज से ग्रसित बच्चे का सर्वाइवल दर काफी कम होता है, लेकिन आधुनिक समय में बढ़ती टेक्नोलॉजी में इस रेयर डिजीज का इलाज संभव है। बेहतर देखरेख से इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है।
एक्टोपिया कोर्डिस के कारण क्या हैं?
फिलहाल एक्टोपिया कोर्डिस किन कारणों से होता है, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, इस डिजीज को क्रोमोसोमल एब्रॉर्मलटिस से जोड़कर देखा गया है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो प्रेग्नेंसी के शुरुआती अवस्था में किसी तरह की परेशानी होने पर बच्चा इससे ग्रसित हो सकता है। वहीं, फीटल डेबलपमेंट के दौरान अगर बच्चे का विकास सही तरीके से न हो, तो इस तरह की परेशानी हो सकती है।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रेग्नेंसी में बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का सेवन करने से इस तरह की स्थिति बन सकती है। ऐसे में ध्यान रखें कि गर्भावस्था में किसी भी दवा का सेवन करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
एक्टोपिया कोर्डिस के लक्षण क्या हैं?
न्यू बॉर्नबेली के जन्म के तुरंत बाद ही इस बीमारी को आसानी से समझा जा सकता है, क्योंकि शिशु का हार्ट चेस्ट कैविटी में न होकर बाहर होता है। इसके अलावा इसके कुछ अन्य लक्षण निम्न हो सकते हैं, जैसे-
- लंग्स का ठीक तरीके से डेवलप न होना।
- स्पाइनल से जुड़ी परेशानियां होना।
- बच्चे को क्लिप्ट पैलेट होना, इत्यादि।
(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
