Thyroid Increasing In Women As Well As Children And Youth: आजकल अगर आपका बच्चा हमेशा थका-थका रहता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता या बार-बार चिड़चिड़ा हो जाता है, तो इसे सिर्फ मोबाइल की लत या खराब दिनचर्या समझकर नजरअंदाज न करें। इसके पीछे का कारण थायरॉइड की समस्या भी हो सकती है। जी हां, थायरॉइड अब सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं रही, ये धीरे-धीरे बच्चों और युवाओं को भी जकड़ रहा है।
Thyroid Increasing In Women As Well As Children And Youth
यह समझना बहुत जरूरी है कि ये बीमारी अंदर ही अंदर न सिर्फ शरीर को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का रास्ता भी खोल रही है। थायराइड को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है। चलिए डॉक्टर से जानते हैं यह बीमारी कैसे बच्चों और युवाओं के लिए भी बड़ा खतरा बन रही है...
बच्चों और किशोरों में तेजी से फैल रहा थायराइड
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के इंटरनल मेडिसिन विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर मोहित शर्मा बताते हैं कि अभी तक थायरॉइड को बड़ी उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। AIIMS दिल्ली के एक रिसर्च में सामने आया है कि भारत में हर 10 में से 1 किशोर को हाइपोथायरॉइडिज़्म की समस्या है। इसका मतलब है कि ये बीमारी अब स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है।
थायरॉइड हार्मोन का सीधा असर बच्चों के विकास, ऊर्जा और मानसिक सेहत पर पड़ता है। अगर बच्चे का वजन अचानक बढ़ने लगे, वह सुस्त दिखे या पढ़ाई में मन न लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
महिलाएं हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
थायरॉइड की समस्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले 5 से 8 गुना ज्यादा होती है, खासकर 25 से 40 साल की उम्र के बीच। इस उम्र में महिलाएं करियर, परिवार और शरीर के कई बदलावों से गुजर रही होती हैं। ऐसे में अगर थायरॉइड बिगड़ जाए, तो इसका असर उनके हार्मोनल बैलेंस, मूड, पीरियड्स और यहां तक कि गर्भधारण पर भी पड़ सकता है। डॉ. शर्मा कहते हैं कि कई बार महिलाएं इसे स्ट्रेस या थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है।
डायबिटीज से भी जुड़ रहा थायरॉइड संबंध
थायरॉइड की समस्या और डायबिटीज अब एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। हाइपोथायरॉइडिज़्म मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है, जिससे शरीर में इंसुलिन का असर घटने लगता है। वहीं हाइपरथायरॉइडिज़्म में ब्लड शुगर लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, जिससे शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
AIIMS की एक स्टडी में पाया गया है कि हर तीसरा थायरॉइड रोगी प्री-डायबिटिक स्टेज में होता है। यानी अगर समय रहते इलाज न हो, तो जल्दी ही टाइप 2 डायबिटीज हो सकती है।
छोटे होते हैं लक्षण
थायरॉइड के लक्षण इतने आम होते हैं कि हम उन्हें अक्सर सीरियसली नहीं लेते। जैसे लगातार थकान महसूस होना, मूड स्विंग्स, बालों का झड़ना, नींद में गड़बड़ी, मेमोरी लॉस या महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना।
डॉ. मोहित शर्मा के मुताबिक ये सभी संकेत हो सकते हैं कि आपके शरीर में थायरॉइड हार्मोन संतुलन में नहीं है। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो थायरॉइड की जांच कराना बहुत जरूरी है।
साधारण जांच से मिल सकता है समय रहते इलाज
थायरॉइड का पता लगाने के लिए कोई बड़ी जांच नहीं करनी पड़ती। एक सिंपल ब्लड टेस्ट जैसे TSH, T3 और T4 से ही इसका डायग्नोसिस हो जाता है। भारत में करीब 4.2 करोड़ लोग थायरॉइड से जूझ रहे हैं, लेकिन उनमें से 60% लोगों को इसका तब पता चलता है जब बीमारी पहले ही काफी बढ़ चुकी होती है। यही वजह है कि डॉक्टर्स लगातार जागरूकता बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
निष्कर्ष
थायरॉइड एक साइलेंट किलर है, जो शरीर में धीरे-धीरे गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अगर समय रहते जांच और इलाज कर लिया जाए, तो इससे बचाव पूरी तरह संभव है। खासकर महिलाएं, बच्चे और युवा अगर थोड़ी भी तकलीफ महसूस करें, तो डॉक्टर से मिलकर एक बार थायरॉइड की जांच जरूर करवाएं। याद रखें, हेल्थ को नजरअंदाज करना आज नहीं, तो कल भारी पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
