पूरे हफ्ते हेल्दी रूटीन फॉलो करने के बाद वीकेंड आते ही बहुत से लोगों की दिनचर्या बदल जाती है। देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, घंटों बैठे रहना, बाहर का खाना और देर रात डिनर करना आम हो जाता है। हमें लगता है कि दो दिन की ऐसी आदतों से शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। लेकिन मेटाबॉलिक हेल्थ के मामले में मामला इतना आसान नहीं है।
वीकेंड की ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी (Photo: iStock)
वीकेंड की कुछ आदतें ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर बुरा असर कर सकती हैं। इंसुलिन वह हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। लंबे समय में यह टाइप-2 डायबिटीज समेत कई मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि वीकेंड पर हमें इन बातों से जरूर बचना चाहिए:
वीकेंड पर बहुत देर तक सोना
सोमवार से शुक्रवार तक कम सोने के बाद कई लोग शनिवार और रविवार को देर तक सोकर इसकी भरपाई करने की कोशिश करते हैं। पर्याप्त नींद जरूरी है, लेकिन सप्ताह के बाकी दिनों और वीकेंड के बीच सोने-जागने के समय में बहुत बड़ा अंतर शरीर की प्राकृतिक लय को प्रभावित कर सकता है।
अनियमित नींद से हार्मोनल संतुलन और इंसुलिन संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल वीकेंड पर ज्यादा सोने के बजाय पूरे सप्ताह पर्याप्त और नियमित नींद लेना बेहतर है।
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वीकेंड को 'चीट डे' बना देना
वीकेंड पर बाहर का खाना, मिठाइयां, फ्राइड या जंक फूड बहुत सामान्य है। कभी-कभार ऐसा खाना कोई बड़ी समस्या नहीं है। दिक्कत तब होती है जब हर सप्ताह शनिवार और रविवार को खाने की मात्रा और कैलोरी अचानक बहुत बढ़ जाती है।
बहुत अधिक शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है। बार-बार होने वाली ऐसी आदतें वजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी समस्याओं में योगदान कर सकती हैं।
वीकेंड पर बिल्कुल एक्टिव न रहना
ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती, इसलिए कई लोग पूरा दिन सोफे पर बैठकर टीवी या मोबाइल देखते रहते हैं। साथ में स्नैक्स चलते रहते हैं। यानी खाने की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर की गतिविधि घट जाती है।
शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों को ग्लूकोज इस्तेमाल करने में मदद करती है और इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में योगदान देती है। इसलिए वीकेंड पर भी टहलना, साइकिल चलाना, घर के काम करना या बच्चों के साथ खेलना जैसी गतिविधियां फायदेमंद हो सकती हैं।
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देर रात खाना
वीकेंड पर देर रात डिनर या आधी रात के बाद स्नैकिंग भी रूटीन का हिस्सा बन जाती है। लेकिन शरीर का मेटाबॉलिज्म पूरे दिन एक जैसा काम नहीं करता। शोध में दिन के शुरुआती हिस्से में ऊर्जा लेने और बेहतर इंसुलिन सेंसिटिविटी के बीच संबंध पाया गया है। इसलिए कोशिश करें कि रात का खाना बहुत देर से न हो और उसमें सब्जियां, प्रोटीन और फाइबर शामिल हों।
वीकेंड का मतलब रूटीन छोड़ना नहीं
इसका मतलब यह नहीं कि शनिवार-रविवार को पसंदीदा खाना या आराम छोड़ दें। असली बात बैलेंस और निरंतरता की है। नींद का समय बहुत ज्यादा न बदलें, खाने का ध्यान रखें और दिन में कुछ समय शरीर को जरूर चलाएं।
आखिर शरीर के लिए शनिवार और रविवार कोई अलग मेटाबॉलिक कैलेंडर नहीं हैं। आपकी सेहत पूरे सप्ताह की आदतों का नतीजा होती है। इसलिए वीकेंड को एंजॉय करें, लेकिन अपनी हेल्दी रूटीन को पूरी तरह छुट्टी न दें।
