कुछ हफ्ते पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में एक रहस्यमयी और जानलेवा बीमारी को Disease X नाम दिया। फ्लू जैसी बीमारी के 400 से ज्यादा मामले दर्ज किए जाने पर, WHO ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए एक टीम भी भेजी। इस बीमारी से पीड़ित लोगों में 50% से अधिक मामले बच्चों के आ रहे थे। हाल ही में कांगो ने Disease X की पहचान कर ली है, जिसने 143 से अधिक लोगों की जान ली थी।
क्या है Disease X
विश्व स्वास्थ्य संगठन इस शब्द का इस्तेमाल प्लेसहोल्डर के तौर पर करता है। ये उन बीमारियों के लिए इस्तेमाल होता है, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हुई है और वे महामारी का रूप ले सकती हैं। WHO ने इस तरह के शब्द का इस्तेमाल इसलिए करना शुरु किया ताकि आने वाले अज्ञात खतरों से बचा जा सके। गया। 'डिजीज एक्स' विज्ञान और स्वास्थ्य सुरक्षा में सतर्कता का प्रतीक है। अफ्रीका के डेमोक्रोटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में फैली इस अनजान बीमारी को Disease X का नाम मिला था पर अब इसका खुलासा हो गया है।
अफ्रीका के Disease X का नाम क्या है
डेमोक्रोटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में साफ किया कि इस बीमारी का रहस्य सुलझ गया है। यह गंभीर मलेरिया है जिसमें सांस से जुड़ी बीमारी के लक्षण हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि अक्टूबर से अब तक इस बीमारी के 592 मामले सामने आए हैं, जिसकी मृत्यु दर 6.2% है।
क्या हैं गंभीर मलेरिया के लक्षण
कांगो में अभी बरसात का मौसम है, जिसमें मलेरिया के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी जाती है। बरसात में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, जिससे डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर मलेरिया से होने वाली लगभग सभी मौतें प्लाजमोडियम फाल्सीपेरम नाम के प्रोटोजोआ के संक्रमण के कारण होती हैं, हालांकि प्लाजमोडियम विवैक्स और प्लाजमोडियम नोलेसी भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, खांसी, बहती नाक, शरीर में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और एनीमिया है।
