AI से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग एआई चैटबॉट्स का अधिक उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण विकसित होने की संभावना 30 प्रतिशत अधिक होती है। यह अध्ययन JAMA Network Open में प्रकाशित हुआ है और इसे मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रॉय पर्लिस द्वारा किया गया। विशेष रूप से, 45 से 64 वर्ष की आयु के नियमित एआई उपयोगकर्ताओं में अवसाद का जोखिम 54 प्रतिशत अधिक होता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि एआई चैटबॉट्स का उपयोग संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि वे वास्तविक संबंधों और पेशेवर देखभाल के स्थान पर न आएं।

हाल के समय में, AI चैटबॉट्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों पर चिंता भी बढ़ रही है। एक नए अध्ययन के अनुसार, जो लोग एआई चैटबॉट्स का भारी उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण विकसित होने की संभावना 30 प्रतिशत अधिक होती है। यह अध्ययन जर्नल JAMA Network Open में प्रकाशित हुआ है और इसका नेतृत्व मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रॉय पर्लिस ने किया।

AI से बढ़ रहा डिप्रेशन (pc: pinterest)

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

अध्ययन के अनुसार, विशेष रूप से मध्य आयु वर्ग के लोग, यानी 35 वर्ष से अधिक आयु के लोग, AI के अधिक उपयोग के कारण अवसाद के उच्च जोखिम में होते हैं। 45 से 64 वर्ष के नियमित एआई उपयोगकर्ताओं में अवसाद का जोखिम 54 प्रतिशत अधिक होता है, जबकि 25 से 44 वर्ष की आयु के लोगों में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि क्या AI का उपयोग अवसाद का कारण बन रहा है या अवसाद से ग्रस्त लोग एआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं। यह संभव है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अपने लक्षणों के लिए सहायता खोजने के लिए एआई का सहारा ले रहे हों।

End of Feed