Sonam Wangchuk अनशन: सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk का दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आमरण अनशन देशभर में बड़ी बहस का केंद्र बन गया है। शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक मामले के साथ साथ इस अनशन ने अब उनकी सेहत को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी है। 18 दिन से खाली पेट अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की स्थिति को देख कई लोग चिंतित हैं। ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि, आखिर कोई इंसान बिना खाना खाए कितने दिन तक जीवित रह सकता है। आमरण अनशन केवल विरोध जताने का एक तरीका नहीं, बल्कि शरीर के लिए बेहद कठिन शारीरिक परीक्षा भी है।
जब शरीर को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो वह सबसे पहले अपने अंदर स्टोर की हुई एनर्जी का इस्तेमाल करता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, शरीर में कमजोरी बढ़ने लगती है और कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ सकता है। हालांकि कोई व्यक्ति कितने दिन तक बिना भोजन रह पाएगा, इसका कोई तय जवाब नहीं है। यह उसकी उम्र, स्वास्थ्य, वजन, शरीर में जमा ऊर्जा और पानी मिलने जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भूखे रहने के दौरान शरीर के अंदर क्या-क्या बदलाव होते हैं और कब यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
सबसे पहले शरीर में क्या होता है?
भोजन बंद होने के बाद शुरुआती 24 घंटे तक शरीर लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग ऊर्जा के लिए करता है। इसी दौरान कई लोगों को तेज भूख, सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। जैसे-जैसे यह ऊर्जा खत्म होती है, शरीर दूसरे स्रोतों से ऊर्जा बनाना शुरू कर देता है।
इसके बाद शरीर कैसे खुद को संभालता है?
ग्लाइकोजन खत्म होने के बाद शरीर जमा वसा (फैट) को ऊर्जा में बदलने लगता है। यही कारण है कि लंबे समय तक भोजन न मिलने पर वजन तेजी से कम होने लगता है। यदि यह स्थिति कई दिनों तक बनी रहे, तो शरीर मांसपेशियों को भी तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करने लगता है। इससे शरीर की ताकत घटती है और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो सकता है।
जरूरी है सावधानी
कोई व्यक्ति कितने दिन भूखा रह सकता है, इसका कोई तय जवाब नहीं है। ये व्यक्ति की उम्र, वजन, पहले से मौजूद बीमारियों, शरीर में जमा ऊर्जा और सबसे महत्वपूर्ण, पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। कुछ लोग कई सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं, जबकि कुछ में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पहले ही शुरू हो सकती हैं। यदि पानी भी न मिले, तो स्थिति बहुत तेजी से गंभीर हो जाती है।लंबे समय तक भोजन न मिलने से शरीर में विटामिन, प्रोटीन और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है और हार्ट, किडनी समेत कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए अनशन जैसी स्थिति में नियमित चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक भोजन छोड़ना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
