Social Contact Jobs Can Increase Risk Of Diabetes: आमतौर पर यह माना जाता है कि डायबिटी की बीमारी का प्रमुख कारण अनुवांशिकी होती है, जो कि सही भी है। लेकिन आपको बता दें कि इसके अलावा जीवनशैली से जुड़ी कई अन्य आदतें भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं। इसके लिए आपका खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपकी नौकरी भी आपको इस गंभीर बीमारी के खतरे में डाल सकती है? हाल ही में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि नौकरी की वजह से भी लोगों में डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। चलिए जानते हैं रिसर्च में क्या कुछ पाया गया है।
Social Contact Jobs Can Increase Risk Of Diabetes
सोशल कॉन्टैक्ट वाली जॉब बढ़ाती है रिस्क
स्वीडन में गई एक स्टडी में पाया गया है कि ऐसी नौकरियां जिनमें रोज कई तरह के लोगों के मिलना-जुलना होता है या सोशल कॉन्टैक्ट बहुत अधिक होता है, इनमें डायबिटीज होने का रिस्क सबसे ज्यादा होता है। इस तरह की नौकरियां सेहत के लिए काफी रिस्की होती हैं। इससे कई तरह के संक्रमण फैलने का खतरा भी सबसे ज्यादा होता है।
जॉब और डायबिटीज के बीच क्या कनेक्शन है?
हाल ही में स्वीडन की कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institute) में की गई एक स्टडी में यह सामने आया कि सोशल कॉन्टेक्ट और इमोशनल डिमांड वाली जॉब्स करने वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। ये रिसर्च करीब 30 लाख लोगों पर 14 साल तक की गई। आइए जानते हैं कैसे ये जॉब्स आपकी सेहत पर असर डाल रही हैं।
हर दिन लोगों से मिलना बन सकता है सेहत पर बोझ
सोशल जॉब्स जैसे कि टीचिंग, हेल्थकेयर, सेल्स या सोशल वर्क में हर दिन अलग-अलग लोगों से मिलना-जुलना आम बात है। लेकिन रिसर्च कहती है कि ऐसा लगातार करने से दिमाग और शरीर पर दबाव पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाने लगता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों में डायबिटीज का खतरा ज्यादा देखा गया।
भावनात्मक जिम्मेदारी से बढ़ता है ब्लड शुगर
जब आपकी जॉब का हिस्सा होता है लोगों की समस्याएं सुनना, उन्हें सहारा देना और मुस्कराते रहना, तब वो भावनात्मक बोझ बन जाता है। रिसर्च में पाया गया कि इमोशनल डिमांड ज्यादा होने पर पुरुषों में डायबिटीज का खतरा 20% और महिलाओं में 24% तक बढ़ सकता है।
महिलाओं में रिस्क और भी ज्यादा देखा गया
स्टडी के मुताबिक, जिन महिलाओं को जॉब के दौरान अपने सहकर्मियों या सीनियर्स से पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिला, उनमें डायबिटीज का खतरा 47% तक देखा गया। यह बताता है कि वर्कप्लेस पर इमोशनल सपोर्ट सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक सेहत के लिए भी जरूरी है।
बहस या तनाव वाली जॉब्स भी बना सकती हैं शुगर पेशेंट
जिन कामों में बार-बार बहस, गुस्सा या टकराव की स्थिति होती है, जैसे कि पुलिसिंग, कस्टमर सर्विस या पब्लिक डीलिंग, वहां डायबिटीज का खतरा और बढ़ जाता है। यह तनाव धीरे-धीरे ब्लड शुगर को बढ़ाने लगता है, जो समय के साथ गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
तो क्या इस तरह की नौकरी नहीं करनी चाहिए?
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अगर आपकी जॉब भी लोगों से जुड़ी है, तो घबराने की बात नहीं। बस इतना ध्यान रखें कि आप अपने खानपान, नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट को बैलेंस में रखें। थोड़ी-सी प्लानिंग और नियमित एक्सरसाइज से आप इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
